यूपी की चर्चित लोकसभा सीट कैसरगंज पर भाजपा के उम्मीदवार को लेकर बना सस्पेंस खत्म हो गया है। इस सीट से मौजूदा सांसद बृज भूषण शरण सिंह चुनाव नहीं लड़ेंगे। भाजपा ने उनके छोटे बेटे करण भूषण को टिकट दिया है। इसका एलान कर दिया गया है।
इसके पहले, टिकट का आश्वासन मिलने के बाद करन भूषण ने अपने पिता व वर्तमान सांसद बृजभूषण शरण सिंह से आशीर्वाद लिया और उनके पैर छुए। आशीर्वाद लेने के दौरान बृजभूषण ने अपने समर्थकों से करण भूषण सिंह को प्रत्याशी बनाए जाने की बात बताई और क्षेत्र में प्रचार करने की बात कही। करन भूषण शुक्रवार सुबह 11.00 बजे नामांकन दाखिल करेंगे।
बृजभूषण शरण सिंह के बेटे करण भूषण सिंह उत्तर प्रदेश कुश्ती संघ के अध्यक्ष हैं। उन्हें इसी साल फरवरी में यूपी कुश्ती संघ का अध्यक्ष चुना गया था। वह डबल ट्रैप शूटिंग के भी राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी रह चुके हैं। उन्होंने अवध यूनिवर्सिटी से बीबीए और एलएलबी किया है। इसके अलावा उन्होंने ऑस्ट्रेलिया से बिजनेस मैनेजमेंट में डिप्लोमा की डिग्री भी ली है। करण भूषण इसके अलावा सहकारी ग्राम विकास बैंक (नवाबगंज, गोण्डा) के अध्यक्ष भी हैं।हालांकि, करण को कैसरगंज से उम्मीदवार बनाए जाने को लेकर भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से बृजभूषण शरण सिंह की बात पहले ही हो चुकी थी। सिर्फ इसका औपचारिक ऐलान होना बाकी था। यह करण का पहला चुनाव होगा। इससे पहले उनके बड़े भाई प्रतीक भूषण को भाजपा विधानसभा चुनाव में टिकट दे चुकी है। वह भाजपा के विधायक हैं। माना जा रहा है कि करण सिंह शुक्रवार 3 मई को नामांकन दाखिल करेंगे। गोंडा और कैसरगंज में शुक्रवार को नामांकन का अंतिम दिन है।
रायबरेली से उम्मीद्वार घोषित किए गए दिनेश प्रताप सिंह उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री है। योगी आदित्यनाथ मंत्रिमंडल में बतौर राज्यमंत्री बनाया गया है। दिनेश कांग्रेस से 2010 में पहली बार और 2016 में दूसरी बार विधान परिषद सदस्य बने थे। 2018 में उन्होंने कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया। 2022 में वह भाजपा के टिकट पर रिकॉर्ड मतों से जीतकर तीसरी बार MLC बने हैं। दिनेश ने 2019 में सोनिया गांधी के खिलाफ चुनाव लड़ा था। उनकी उम्मीदवारी की वजह से सोनिया गांधी के वोटों का ग्राफ काफी नीचे आया।
दिनेश के अलावा उनके भाई और परिवार के अन्य सदस्य विधायक, ब्लॉक प्रमुख और जिला पंचायत अध्यक्ष जैसे पदों पर रहे। 2022 के चुनाव में हरचंदपुर सीट से भाई और विधायक राकेश सिंह की हार के बाद उनके विरोधियों को लगा था कि राजनीति में पंचवटी का प्रभाव कुछ कम हो जाएगा, लेकिन भाजपा ने पहले MLC का टिकट देकर फिर योगी 2.0 सरकार में स्वतंत्र प्रभार का मंत्री बनाकर उन्हें रायबरेली के मैदान में गांधी परिवार के खिलाफ मजबूत उपस्थिति दर्ज की।



