अयोध्या, संस्कृति विभाग उत्तर प्रदेश द्वारा आयोजित रामोत्सव के तुलसी मंच पर नवरात्रि के प्रथम दिन अंतरराष्ट्रीय कलाकारो की प्रस्तुति ने सभी को मोह लिया। दुबई से आए टीम मोहाना के तीस महिला कलाकारो ने एक साथ रामायण के श्लोकों को गाकर वातावरण में राम रस घोल दिया।
रामायण के प्रसंगों पर भरतनाट्यम शैली में नृत्य के माध्यम से राम कथा को देखना सभी को रोमांचित कर दिया। चौबीस रागों में निबद्ध संपूर्ण रामायण का गायन जहां सभी को आनंदित कर रहा था वहीं शास्त्रीय नृत्य प्रस्तुति को और प्रभावी बना रहा था।
अपने सधे स्वर और कदमताल से कलाकारो द्वारा प्रदर्शित राम चरित्र को दर्शक मंत्रमुग्ध होकर देख रहे थे। राधिका, आनंद, विनय, दीपा और रूपा के निर्देशन में दुबई से आए कलाकार प्रदर्शन के बाद अभिभूत दिखे।
इसके पहले बरेली से आए श्रीयांश मणि ने अपने सुरीले स्वर में जैसे गाया ऐ री सखी,मोरे प्रभु घर आए है तो वातावरण राममय हो गया। इसके बाद अपने सधे अंदाज में राम नाम के हीरे मोती गाकर सभी को मुग्ध कर दिया। जन्मोत्सव के रंग में ठुमुक चलत रामचंद्र, बाजत पैजनियां गया तो दर्शक तालियों से साथ देने लगे। अयोध्या में रघुकुल दीपक आए है गाकर प्राण प्रतिष्ठा के प्रति अपनी भावनाएं व्यक्त की। तबले पर नीरज कुमार और बांसुरी पर नीरज कुमार ने संगत की।

इसके बाद प्रयागराज से आए प्रत्युष श्रीवास्तव ने अपने दल के साथ प्रस्तुति दी। जलतरंग जैसे वाद्ययंत्र पर सजा दो घर को गुलशन सा बजा कर सभी को हतप्रभ कर दिया। हमारे साथ रघुनाथ तो किस बात किस बात की चिंता सुनकर सभी तालियां बजाने लगे। इसके बाद प्रत्युष ने भजन गायन भी किया। तुम उठो सिया श्रृंगार करो और राम को देख कर जनक नंदनी खड़ी की खड़ी रह गई सुनकर सभी आनंदित हो गए। इसी भाव में रघुनंदन प्रभु अवध कुमारा सुनाकर वातावरण में भक्तिभाव का संचरण कर दिया अंत में नगरी हो अयोध्या सी गाकर अयोध्या के वैभव को वर्णित किया।

लखनऊ से आए शिवलाल भारद्वाज ने इसके बाद तेरा रामजी करेंगे बेड़ा पार से प्रभु के प्रति समर्पण दिखाया। राम नाम रस मीठा है कोई गा कर देख ले और लेके पूजा की थाली जैसे भजनों को सुनकर सभी नृत्य करने लगे।

कार्यक्रम का संचालन भक्तिपूर्ण भाव से आकाशवाणी के उद्घोषक देश दीपक मिश्र ने किया। उत्तर प्रदेश लोक एवम जनजाति संस्कृति संस्थान लखनऊ के निदेशक अतुल द्विवेदी के निर्देशन में कलाकारो का सम्मान स्मृति चिन्ह देकर अतुल कुमार सिंह ने किया। इस अवसर पर भारी संख्या में दर्शक और संत जन उपस्थित रहे।



