भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने चाय में दो कीटनाशकों के अवशेषों की अधिकतम अनुमत सीमा तय करने के लिए नए नियमों का मसौदा अधिसूचित किया है। इसमें एसिटामिप्रिड के लिए 20 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम और इमिडाक्लोप्रिड के लिए 50 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम की अधिकतम अवशेष सीमा (MRL) प्रस्तावित की गई है।
यह मसौदा 16 अक्टूबर 2026 को भारत के राजपत्र में प्रकाशित किया गया। प्रस्तावित सीमाओं का उद्देश्य चाय में कीटनाशक अवशेषों की निगरानी, खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुपालन और नियामकीय कार्रवाई के लिए स्पष्ट मानदंड उपलब्ध कराना है। हालांकि, ये सीमाएं मसौदा विनियमों को अंतिम रूप दिए जाने के बाद ही लागू होंगी।
एफएसएसएआई ने खाद्य सुरक्षा एवं मानक (संदूषक, विषैले पदार्थ एवं अवशेष) संशोधन विनियम, 2026 के तहत यह प्रस्ताव रखा है। इसके अनुसार, चाय में एसिटामिप्रिड की अधिकतम अवशेष सीमा 20 पीपीएम और इमिडाक्लोप्रिड की सीमा 50 पीपीएम निर्धारित करने का प्रस्ताव है।
नियामक का कहना है कि कीटनाशक अवशेषों के लिए स्पष्ट मानक होने से खाद्य पदार्थों की जांच, निगरानी और नियमों के अनुपालन को सुनिश्चित करने में मदद मिल सकती है।
प्रस्तावित मसौदे में एसिटामिप्रिड की सीमा की तुलना अंतरराष्ट्रीय मानकों से भी की गई है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, जापान में चाय के लिए इसकी सीमा 30 पीपीएम और अमेरिका में 50 पीपीएम बताई गई है, जबकि भारत में 20 पीपीएम का प्रस्ताव है।
इमिडाक्लोप्रिड के लिए प्रस्तावित सीमा को भी अंतरराष्ट्रीय कोडेक्स मानकों के संदर्भ में निर्धारित किए जाने की बात कही गई है। इन प्रावधानों के जरिए घरेलू कृषि जरूरतों और खाद्य सुरक्षा से जुड़े मानकों के बीच संतुलन बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
यह पहल कीटनाशक अवशेषों से संबंधित नियमों की समीक्षा की व्यापक प्रक्रिया का हिस्सा है। इससे पहले खाद्य सुरक्षा एवं मानक (संदूषक, विषैले पदार्थ एवं अवशेष) संशोधन विनियम, 2024 के तहत उपलब्ध वैज्ञानिक आंकड़ों और अंतरराष्ट्रीय प्रथाओं के आधार पर अवशेष सीमाओं की समीक्षा की गई थी। नियामक उपायों के तहत उच्च विषाक्तता वाले 13 कीटनाशकों को सूची से हटाए जाने का भी उल्लेख किया गया है।
अधिकतम अवशेष सीमा किसी खाद्य पदार्थ में कीटनाशक के अवशेषों की कानूनी रूप से अनुमत अधिकतम सांद्रता निर्धारित करती है। इन सीमाओं को तय करते समय कीटनाशक अवशेषों से जुड़े आंकड़ों, आहार के माध्यम से संभावित संपर्क और सुरक्षा संबंधी पहलुओं का वैज्ञानिक आकलन किया जाता है। निर्धारित मानक खाद्य पदार्थों की जांच और नियामकीय निगरानी के लिए मापने योग्य आधार उपलब्ध कराते हैं।
एफएसएसएआई के प्रस्ताव में कृषि उत्पादन और फसल सुरक्षा की जरूरतों को भी ध्यान में रखने की बात कही गई है। उचित तरीके से और निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुसार कीटनाशकों का इस्तेमाल करने से किसानों को फसलों को कीटों से बचाने तथा नुकसान कम करने में मदद मिल सकती है। नियामकीय दृष्टिकोण का उद्देश्य कृषि उत्पादकता की जरूरतों के साथ उपभोक्ताओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देना है।
प्राधिकरण की ओर से दिए गए आंकड़ों के अनुसार, भारत में प्रति हेक्टेयर कीटनाशकों का औसत उपयोग 0.5 किलोग्राम से कम है, जबकि अनुमानित वैश्विक औसत 2.38 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर बताया गया है। इन आंकड़ों को देश की कृषि पद्धतियों के संदर्भ में प्रस्तुत किया गया है।
हालांकि, कीटनाशकों के उपयोग की मात्रा और खाद्य पदार्थों में उनके अवशेषों का स्तर अलग-अलग पहलू हैं, इसलिए खाद्य सुरक्षा के आकलन में उत्पादों की जांच और निर्धारित मानकों का अनुपालन महत्वपूर्ण रहता है।
चाय उद्योग के लिए प्रस्तावित सीमाएं उत्पादकों, प्रसंस्करणकर्ताओं, खाद्य कारोबार से जुड़े प्रतिष्ठानों, परीक्षण प्रयोगशालाओं और प्रवर्तन अधिकारियों को स्पष्ट नियामकीय दिशा देने के उद्देश्य से तैयार की गई हैं।
मसौदे के अंतिम रूप लेने के बाद इन मानकों के जरिए चाय में संबंधित कीटनाशकों के अवशेषों की निगरानी और नियमों के अनुपालन की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने में मदद मिल सकती है।