तेल अवीव जा रहे फ्लाईदुबई के विमान में सह-पायलट द्वारा कैप्टन पर कथित हमले के बाद पैदा हुए गंभीर संकट के दौरान दो अतिरिक्त पायलटों ने कॉकपिट में पहुंचकर विमान का नियंत्रण संभाला। उनकी त्वरित कार्रवाई के बाद विमान को सऊदी अरब के तबूक में उतारा गया। हालांकि, घटना के बाद इन दोनों पायलटों की पहचान अब तक सार्वजनिक नहीं की गई है।
विमान में सवार यात्री डेनियल श्लिख्टर के मुताबिक, जब यात्रियों को कॉकपिट में हो रही घटना का पता चला तो विमान में चीख-पुकार मच गई। सह-पायलट कथित तौर पर कैप्टन पर बार-बार हमला कर रहा था और कॉकपिट में खून फैला हुआ था। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद कैप्टन कॉकपिट का दरवाजा खोलने में सफल रहा।
इसके बाद एक यात्री ने सह-पायलट को पकड़कर कॉकपिट से बाहर खींच लिया और अन्य यात्रियों ने उसे काबू करने की कोशिश की। इसी दौरान विमान में यात्री के रूप में मौजूद एक अतिरिक्त पायलट तेजी से कॉकपिट में पहुंचा और विमान का नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया। कुछ ही देर बाद दूसरा पायलट भी कॉकपिट में पहुंच गया। दोनों ने दरवाजा बंद कर विमान को संभालने की कोशिश शुरू की।
बताया गया कि दोनों पायलट विमान में इसलिए यात्रा कर रहे थे क्योंकि उन्हें तेल अवीव से वापस दुबई जाने वाली उड़ान का संचालन करना था। विमानन क्षेत्र में चालक दल के किसी सदस्य का यात्री के तौर पर यात्रा करना ‘डेडहेडिंग’ कहलाता है।
श्लिख्टर के अनुसार, पहला अतिरिक्त पायलट बेहद तेजी से कॉकपिट तक पहुंचा और ऐसा लगा कि उसने तुरंत स्थिति को समझ लिया है। उन्होंने कहा कि उस समय उसकी कार्रवाई किसी नायक से कम नहीं थी। हालांकि, यात्रियों को उस वक्त यह जानकारी नहीं थी कि कॉकपिट में पहुंचे दोनों पायलट कौन हैं।
विमान तेजी से नीचे आया था और उसे स्थिर करने में करीब 10 मिनट या उससे अधिक समय लग सकता है। इस दौरान विमान के पिछले हिस्से को भी नुकसान पहुंचा, जिसमें रडर के क्षतिग्रस्त होने की बात सामने आई। पायलटों ने सुरक्षित लैंडिंग की जगह तलाशते हुए आपातकालीन ‘मेडे’ कॉल भी की।
विमान का नियंत्रण संभालने के बाद भी दोनों पायलटों ने तत्काल यात्रियों से संपर्क नहीं किया। इससे कुछ यात्रियों की चिंता बढ़ गई। श्लिख्टर ने बताया कि उस समय उनके मन में यह आशंका भी आई कि कहीं स्थिति और खराब न हो जाए। उन्हें डर था कि विमान को ईरान या किसी अन्य स्थान की ओर मोड़ा जा सकता है।
करीब 45 मिनट बाद पायलटों ने घोषणा की कि विमान को सऊदी अरब के तबूक में उतारा जाएगा और सब कुछ ठीक हो जाएगा। इसके बाद यात्रियों को राहत मिली और उनका भरोसा बहाल हुआ।
घटना के बाद अब इन दोनों अतिरिक्त पायलटों की भूमिका चर्चा में है। हालांकि फ्लाईदुबई की ओर से उनकी पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है और यह भी स्पष्ट नहीं है कि एयरलाइन ने दोनों पायलटों के नाम सार्वजनिक नहीं करने का फैसला क्यों लिया।
फिलहाल यात्रियों के बयानों से इतना जरूर सामने आया है कि संकट के दौरान दोनों पायलटों ने कॉकपिट में पहुंचकर विमान का नियंत्रण संभालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।