पाकिस्तान में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) और संघीय सरकार के बीच शुक्रवार को बातचीत शुरू हुई। यह वार्ता ऐसे समय हो रही है जब पीटीआई ने 4 अक्टूबर को इस्लामाबाद तक लॉन्ग मार्च निकालने की घोषणा कर रखी है।
दोनों पक्षों के बीच बातचीत का उद्देश्य मौजूदा राजनीतिक तनाव को कम करने और टकराव की स्थिति से बचने के रास्ते तलाशना बताया जा रहा है।
اب تک 4 کروڑ روپے سے زائد رقم جمع ہو چکی ہے، فنڈ ریزنگ مہم کل بھی جاری رہے گی، 4 اکتوبر کو گنڈی چوک لکی مروت سے لانگ مارچ کا آغاز کریں گے، 6 اکتوبر رات کو پشاور متنی پہنچیں گے، آج رات آپ کو مزید پلان دے دیا جائے گا، وزیراعلی سہیل آفریدی pic.twitter.com/Orm8OnlSGm
— Kamran Ali (@akamran111) October 2, 2026
बातचीत नेशनल असेंबली के अध्यक्ष सरदार अयाज सादिक के कक्ष में हुई। अयाज सादिक दोनों पक्षों के बीच संवाद में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। सरकारी पक्ष की ओर से प्रधानमंत्री के राजनीतिक मामलों के सलाहकार राणा सनाउल्लाह के अलावा गृह मंत्री मोहसिन नकवी, राज्य मंत्री तलाल चौधरी और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के नेताओं समेत अन्य प्रतिनिधि शामिल हुए।
विपक्ष की ओर से पीटीआई अध्यक्ष बैरिस्टर गौहर अली खान, सीनेट में विपक्ष के नेता अल्लामा राजा नासिर अब्बास, सलमान अकरम राजा, असद कैसर और आमिर डोगर समेत छह सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने हिस्सा लिया।
पीटीआई की ओर से बातचीत में इमरान खान से तत्काल मुलाकात की अनुमति और उनकी चिकित्सकीय जांच से जुड़ी मांगें रखी गई हैं। पार्टी का कहना है कि खान को ऐसे अस्पताल में इलाज और जांच की सुविधा मिलनी चाहिए, जहां उनके निजी डॉक्टर भी उनकी स्थिति का आकलन कर सकें।
इसके अलावा पीटीआई ने प्रदर्शन से पहले गिरफ्तार किए गए नेताओं और इमरान खान की बहनों की रिहाई, उनकी पत्नी बुशरा बीबी की चिकित्सकीय जांच तथा पार्टी नेताओं से जुड़े मामलों की निष्पक्ष सुनवाई की मांग भी उठाई है।
पीटीआई ने पहले अपने प्रस्तावित लॉन्ग मार्च को 27 सितंबर से टालकर 4 अक्टूबर करने का फैसला किया था। पार्टी की ओर से कहा गया है कि मार्च का उद्देश्य इमरान खान की रिहाई और संवैधानिक व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को उठाना है। बातचीत के बीच भी पीटीआई ने संकेत दिया है कि मार्च का फैसला वार्ता के परिणाम और सरकार के रुख से जुड़ा रहेगा।
उधर, पाकिस्तान सरकार ने इस्लामाबाद में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। राजधानी की ओर जाने वाले कई मार्गों पर कंटेनर लगाए गए हैं और अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है। इससे पहले सरकार की ओर से विपक्ष से लॉन्ग मार्च वापस लेने की अपील भी की गई थी।
शुक्रवार को हुई बातचीत का पहला दौर पूरा होने के बाद दोनों पक्षों ने शनिवार को फिर वार्ता जारी रखने पर सहमति जताई। ऐसे में अब 4 अक्टूबर के प्रस्तावित लॉन्ग मार्च से पहले होने वाली अगली बातचीत और उसमें सामने आने वाले किसी संभावित समाधान पर सबकी नजर है।