लखनऊ, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने वर्ष 2020 में गैंगस्टर विकास दुबे की पुलिस मुठभेड़ में हुई मौत का जिक्र करते हुए कहा है कि अगर उनकी पार्टी उत्तर प्रदेश की सत्ता में आती है तो ‘कार कैसे पलटी’ इसकी जांच रिमोट सेंसिंग विभाग से कराई जाएगी।
उन्होंने कहा कि अपराध नियंत्रण के लिए रिमोट सेंसिंग के साथ आधुनिक तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का इस्तेमाल भी किया जाएगा।
लखनऊ स्थित सपा कार्यालय में संवाददाताओं से बातचीत में अखिलेश यादव ने कहा कि रिमोट सेंसिंग विभाग काफी पुराना विभाग है और सत्ता में आने पर उसे विकास दुबे से जुड़ी उस घटना की जांच का काम सौंपा जाएगा, जिसमें पुलिस के अनुसार उज्जैन से कानपुर लाते समय वाहन दुर्घटनाग्रस्त होकर पलट गया था।
उन्होंने कहा कि विभाग को इसके लिए अलग से धन उपलब्ध कराया जाएगा और वाहनों की आवाजाही तथा उनके रास्ते की जानकारी तकनीक के माध्यम से पता लगाने के निर्देश दिए जाएंगे।
अखिलेश यादव ने कहा कि रिमोट सेंसिंग और एआई का इस्तेमाल केवल इस मामले तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अपराध से निपटने के लिए भी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इससे कथित फर्जी मुठभेड़ जैसी घटनाओं की जांच में भी मदद मिल सकती है।
यह मामला जुलाई 2020 के बिकरू कांड से जुड़ा है। दो-तीन जुलाई 2020 की रात कानपुर देहात के बिकरू गांव में पुलिस टीम पर हमला हुआ था, जिसमें आठ पुलिसकर्मियों की मौत हुई थी। इस मामले के मुख्य आरोपी विकास दुबे को नौ जुलाई 2020 को मध्य प्रदेश के उज्जैन से गिरफ्तार किया गया था। अगले दिन उसे पुलिस वाहन से कानपुर लाया जा रहा था। पुलिस के अनुसार वाहन दुर्घटनाग्रस्त होकर पलट गया और इसके बाद विकास दुबे ने भागने की कोशिश की, जिसके दौरान हुई मुठभेड़ में उसकी मौत हो गई।
विकास दुबे की मौत को लेकर उस समय भी सवाल उठे थे। मामले की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर न्यायिक आयोग गठित किया गया था। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार आयोग ने पुलिस द्वारा बताए गए घटनाक्रम का समर्थन किया था।
अखिलेश यादव पहले भी विकास दुबे की मौत को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। ताजा बयान में उन्होंने रिमोट सेंसिंग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और अन्य आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल की बात कही है। यह बयान 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले सपा की राजनीतिक गतिविधियों के बीच आया है।