लखनऊ, 20 सितंबर। बहुजन समाज पार्टी (BSP) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने अपने परिवार के सदस्यों की पार्टी में भूमिका को लेकर एक बार फिर बड़ा फैसला लिया है। मायावती ने रविवार को स्पष्ट किया कि उनके छोटे भाई आनंद कुमार के बेटे आकाश आनंद और बेटी दीपिका आनंद को अब पार्टी में कोई जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी। वहीं, परिवार में से केवल ईशान आनंद को पार्टी में सम्मानजनक जिम्मेदारी देकर आगे बढ़ाया जाएगा।
मायावती ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जारी बयान में कहा कि पार्टी हित को ध्यान में रखते हुए उन्होंने यह निर्णय लिया है और अब इसमें कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। उनका यह फैसला 12 सितंबर को लिए गए उस फैसले के आठ दिन बाद आया है, जिसमें उन्होंने आनंद कुमार के दोनों बेटों आकाश और ईशान को पार्टी में किसी भी छोटे या बड़े पद पर रहकर राजनीति करने से दूर रखने की बात कही थी। उस समय उन्होंने जरूरत पड़ने पर आनंद कुमार की मदद के लिए उनकी बेटी दीपिका की सहायता लेने की संभावना जताई थी।
अब मायावती ने दीपिका को भी पार्टी की जिम्मेदारियों से दूर रखने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि आकाश और दीपिका के स्थान पर ईशान आनंद को संगठन में आगे बढ़ाया जाएगा। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यदि भविष्य में ईशान किसी गंभीर पार्टी-विरोधी गतिविधि में शामिल पाए जाते हैं तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी और ऐसी स्थिति में आनंद कुमार के परिवार के किसी अन्य सदस्य को पार्टी में जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी।
मायावती ने आकाश आनंद को लेकर अपने पहले के फैसले का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि शादी के बाद आकाश के रवैये और गतिविधियों के कारण उन्हें हाल में पार्टी से अलग करना पड़ा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आकाश की पार्टी में वापसी का सवाल नहीं है। मायावती ने आकाश के ससुर और पूर्व बसपा राज्यसभा सदस्य अशोक सिद्धार्थ का भी उल्लेख करते हुए अपने फैसले को पार्टी हित से जोड़ा है।
बसपा प्रमुख ने अपने फैसले को पार्टी संस्थापक कांशीराम की कार्यशैली से भी जोड़ा। उन्होंने कहा कि कांशीराम ने अपने करीबी रिश्तेदारों को राजनीतिक लाभ देने से दूरी बनाए रखी थी और वह भी इसी सिद्धांत पर चलने का प्रयास करती रही हैं।
मायावती के ताजा फैसले के बाद आनंद कुमार के परिवार में पार्टी की राजनीतिक भूमिका फिलहाल ईशान आनंद तक सीमित दिखाई दे रही है। बसपा की 23 सितंबर को प्रस्तावित अखिल भारतीय बैठक से पहले आया यह फैसला पार्टी संगठन में परिवार की भूमिका को लेकर मायावती के हालिया निर्णयों की अगली कड़ी है।