राष्ट्रीय राजमार्गों के टोल प्लाजा पर कथित फर्जी सॉफ्टवेयर के जरिए टोल वसूली में हेराफेरी के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। ED के लखनऊ जोनल कार्यालय की अगुवाई में उत्तर प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, जम्मू-कश्मीर, मध्य प्रदेश, दिल्ली-NCR और पश्चिम बंगाल में कुल 14 ठिकानों पर तलाशी ली गई। यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के तहत की जा रही है।
जांच के केंद्र में आरोप है कि कुछ टोल प्लाजा पर NHAI के अधिकृत सॉफ्टवेयर और सर्वर के समानांतर अनधिकृत सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया जा रहा था। इसके जरिए ऐसी टोल रसीदें तैयार की जाती थीं, जिनका पूरा रिकॉर्ड NHAI के आधिकारिक सिस्टम में दर्ज नहीं होता था। ED अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस कथित नेटवर्क से कितनी रकम बाहर निकाली गई और उसका अंतिम लाभार्थी कौन है।
UP STF ने किया था नेटवर्क का खुलासा
इस पूरे मामले की शुरुआत उत्तर प्रदेश STF की कार्रवाई से हुई थी। जनवरी 2025 में STF ने मिर्जापुर के शिवगुलाम टोल प्लाजा से जुड़े मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया था। जांच में सामने आया कि NHAI के सॉफ्टवेयर के अलावा समानांतर सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर टोल वसूली को कथित तौर पर अलग दिशा में भेजा जा रहा था।
STF के अनुसार, आलोक कुमार सिंह नामक आरोपी को सॉफ्टवेयर तैयार करने और टोल प्लाजा पर उसे स्थापित करने में विशेषज्ञता थी। STF की जांच में उसके द्वारा ऐसे सॉफ्टवेयर को कई टोल प्लाजा पर लगाए जाने की बात सामने आई थी। दिल्ली हाईकोर्ट के रिकॉर्ड में भी STF की जांच और आलोक कुमार सिंह के बयान से जुड़े ये आरोप दर्ज हैं।
जांच के मुताबिक, बिना FASTag या अपर्याप्त बैलेंस वाले वाहनों से नियमों के तहत अधिक टोल वसूला जाता था। आरोप है कि इसी रकम को समानांतर सॉफ्टवेयर के जरिए NHAI के आधिकारिक रिकॉर्ड से बाहर रखा जाता था। STF के पुराने रिकॉर्ड में यह भी कहा गया था कि कुछ मामलों में मूल NHAI सॉफ्टवेयर में केवल करीब 5 प्रतिशत लेनदेन दर्ज किया जाता था, जबकि बाकी रकम की कथित हेराफेरी होती थी। हालांकि, यह आंकड़ा STF की जांच में सामने आया आरोप है, इसे अंतिम रूप से सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता।
200 से ज्यादा टोल प्लाजा जांच के दायरे में
अब ED इस नेटवर्क के 200 से अधिक टोल प्लाजा तक जुड़े होने की जानकारी की जांच कर रही है। इनमें करीब 100 टोल प्लाजा उत्तर प्रदेश के बताए जा रहे हैं। एजेंसी डिजिटल रिकॉर्ड, कंप्यूटर सिस्टम, बैंक खातों, दस्तावेजों और कथित बेनामी संपत्तियों से जुड़े वित्तीय लेनदेन की पड़ताल कर रही है।
वाराणसी के हरहुआ इलाके में रहने वाले आलोक सिंह को इस नेटवर्क का कथित प्रमुख आरोपी बताया गया है। STF के मुताबिक, उसके पास से लैपटॉप, मोबाइल फोन, प्रिंटर और अन्य सामान बरामद किया गया था।
इसके अलावा भदोही के लाला नगर टोल प्लाजा से जुड़े करीब 62.87 करोड़ रुपये की कथित स्टांप ड्यूटी चोरी का मामला भी अलग से जांच के दायरे में है। 2025 में सामने आए इस मामले में 3,144 करोड़ रुपये के 15 वर्षीय टोल अनुबंध पर महज 100 रुपये के स्टांप का इस्तेमाल किए जाने का आरोप लगा था। इस मामले में जिला कलेक्टर की अदालत में कार्रवाई शुरू की गई थी।
अब ED का मुख्य फोकस कथित टोल घोटाले की पूरी मनी ट्रेल सामने लाने पर है। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि अवैध तरीके से जुटाई गई रकम किन खातों में पहुंची, किन लोगों या कंपनियों के बीच बांटी गई और इससे संपत्तियां कहां बनाई गईं। जांच अभी जारी है।