बागपत जिले के चांदीनगर क्षेत्र में करीब तीन सप्ताह से लापता दो युवकों के शव बुधवार को लहचौड़ा गांव में एक महंत के आवासीय परिसर से बरामद किए गए जिसके बाद पुलिस ने दो लोगों को हिरासत में लिया है।
पुलिस अधीक्षक सूरज कुमार राय ने बताया कि लहचौड़ा निवासी अंकित (25) और इसरार (32) के 25 जुलाई से लापता होने की सूचना मिलने पर 29 जुलाई को चांदीनगर थाने में मामला दर्ज किया गया था। अधिकारी के अनुसार मुख्य आरोपी बताए जा रहे महंत की तलाश की जा रही है।
उन्होंने बताया कि पुलिस ने दोनों की तलाश के लिए एक टीम गठित कर तकनीकी साक्ष्यों और अन्य माध्यमों से जांच शुरू की थी।
पुलिस अधीक्षक ने बताया कि जांच के दौरान मिले साक्ष्यों और हिरासत में लिए गए लोगों से पूछताछ के आधार पर पता चला कि दोनों युवकों के शव स्थानीय मंदिर के महंत नरेश नाथ के आवासीय परिसर में दफन किए गए थे।
इसके बाद पुलिस ने बुधवार को खुदाई कर दोनों शव बरामद कर लिए। राय ने बताया कि मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में पंचनामा भरकर शवों को पोस्टमार्टम के लिए ले जाया गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत के कारण और हत्या के तरीके के बारे में स्थिति स्पष्ट होगी।
पुलिस के अनुसार, शव क्षत-विक्षत हालत में थे और उनकी पहचान कपड़ों तथा अन्य वस्तुओं के आधार पर की गई। घटनास्थल से फॉरेंसिक दल ने भी साक्ष्य जुटाए हैं।
पुलिस के मुताबिक, मामले में उज्ज्वल और कृष्णा यादव को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है और अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। उसने बताया कि जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर मामले में आवश्यक कानूनी धाराएं भी जोड़ी गई हैं।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, जांच में सामने आया है कि दोनों युवकों की महंत नरेश नाथ से जान-पहचान थी। परिजनों के मुताबिक, अंकित और इसरार पुराने दोस्त थे और उनके घर आमने-सामने हैं।
इसरार के भाई फरीद ने बताया कि दोनों 25 जुलाई को मोटरसाइकिल से घर से निकले थे और वापस नहीं लौटे। उन्होंने बताया कि 27 जुलाई की शाम से दोनों के मोबाइल फोन भी बंद हो गए जिसके बाद परिजनों ने 29 जुलाई को थाने में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई।
फरीद ने दावा किया कि अंकित की बहन और महंत के बीच कथित संबंधों को लेकर पहले भी विवाद हुआ था। उन्होंने बताया कि 25 जुलाई को दोनों युवक संभवत: महंत से बात करने के लिए उसके आवासीय परिसर गए होंगे, लेकिन वहां उनके साथ क्या हुआ, इसकी जानकारी परिवार को नहीं थी।










