लखनऊ, इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने 326-A IPC से जुड़े एक गंभीर आपराधिक मामले में अहम आदेश पारित करते हुए दोषसिद्ध अभियुक्त अमरनाथ को बड़ी राहत दी है।
न्यायालय ने अभियुक्त की अपील लंबित रहने तक उसकी सजा को निलंबित करते हुए जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है। अभियुक्त को ट्रायल कोर्ट द्वारा IPC की धारा 326-A के अंतर्गत अधिकतम 10 वर्ष की कठोर कारावास की सजा सुनाई गई थी, जो सभी सजाएं साथ-साथ चलने के आदेश के साथ दी गई थीं।
यह आदेश माननीय न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान और माननीय न्यायमूर्ति राम मनोहर नारायण मिश्र द्वारा पारित किया गया। मामला जनपद अंबेडकर नगर के थाना अकबरपुर से संबंधित है।
मामला क्या है?
प्रकरण के अनुसार, अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया था की 16.11.2016 को क़रीब 06:00 बजे सुबह पीड़िता लगभग 18 वर्ष शौच के लिए गई थी, जैसे ही मेवालाल के घर सामने पहुँची वैसे ही बसखारी के तरफ़ से आ रही बुलेरो गाड़ी अचानक ब्रेक ली और पीड़िता रोड के किनारे से हट गई, तभी गाड़ी में आगे वाली सीट बैठे अमरजीत ने तेजाब फेक दिया जिससे चेहरे पर दाहिने तरफ़ और दोनों पैरों पे तेजाब पद गया, जिससे गंभीर रूप से घायल हो गई। अमरजीत और गाड़ी चालक पटेल नगर की तरफ़ भाग गए।
हाईकोर्ट में दोषी अमरनाथ की ओर अधिवक्ता अभिनव श्रीवास्तव द्वारा यह दलील दी गई कि वह सजा के बाद केवल कुछ महीनों से जेल में है और मामले में कई गंभीर कानूनी प्रश्न हैं, जिन पर अपील में विस्तृत सुनवाई आवश्यक है।
बचाव पक्ष ने अदालत का ध्यान इस ओर दिलाया कि—
• दोषी अमरनाथ का नाम एफ.आई.आर में लिया गया ना ही पीड़िता के 161 सीआरपीसी के बयान में |
• घटना 16.11.2016 की है एफ.आई.आर 16.11.2016 की है मगर मेडिकल 29.11.2016 को कराया जाता है, घटना के 15 दिनों के बाद पीड़िता का मेडिकल करवाने का कोई भी स्पष्टीकरण नहीं दिया गया I
• पीड़िता का एफ आई आर,161 सीआरपीसी के बयान में केवल दो लोगों का घटना कारित करना बताया जाता है, इसमें एक इंसान का नाम लिखा और दूसरा के मुँह पर कपड़ा बाँधा होना बताया जाता है, मगर 164 और कोर्ट के समक्ष पीड़िता तीन लोगो का नामित कर देती है और तीन द्वारा अपराध कारित करना बताती है |
• पीड़िता द्वारा न्यायालय में यह कथन किया जाता है कि अमरनाथ ने हाथ पकड़ा था पीड़िता का और अमरजीत ने एसिड फेक था |
• पीड़िता द्वारा न्यायालय में यह बयान दिया जाता है कि वो अमरनाथ को ना पहले से जानती है ना ही पहले कभी मिली है और न्यायालय में उसने अमरनाथ को पहचाना भी नहीं |
• अमरनाथ के ख़िलाफ़ इतना ही आरोप था कि उसके द्वारा पीड़िता का हाथ पकड़ा गया मगर सज़ा उसको धारा 326-ए में हुई जो 326-ए में अपराध की श्रेणी में नहीं आता है, अधिवक्ता अभिनव श्रीवास्तव द्वारा यह भी क़ानूनी प्रश्न उठाया गया कि न्यायालय ने कॉमन इंटेंशन में सजा न देकर अमरनाथ को 326-ए आईपीसी में सजा दी और अपने निर्णय में कहीं भी उल्लेखित नहीं किया कि कैसे हाथ पकड़ने पर बिना धारा 34 आईपीसी के 326-ए में सजा हो सकती है ?
सभी तथ्यों, परिस्थितियों और साक्ष्यों पर विचार करते हुए हाईकोर्ट ने पाया कि—
पीड़िता के बयान में विरोधाभास हैं
दोषी पर कोई विशिष्ट भूमिका नहीं दर्शायी गई और ना ही उसने एसिड फेका और ना उसका कोई मोटिव साबित था केस में |
मेडिकल घटना के 15 दिनों बाद कराया गया और डिले का कोई कारण नहीं बताया गया
अमरनाथ के खिलाफ 326-ए में सजा कैसे साबित होती है इसका निर्णय में कोई उलेख्य नहीं है
अभियुक्त ट्रायल के दौरान जमानत पर था और उसने कोई दुरुपयोग नहीं किया
अमरनाथ की मेडिकल कंडीशन लगातार खराब ग़लत में है और उसको न्यायालय द्वारा 20 दिन की इंटरिम बेल भी दी गई थी
अपील की सुनवाई में काफी समय लगने की संभावना है
मामले में कानूनी प्रश्न गहन विचार योग्य हैं
इन परिस्थितियों में न्यायालय ने कहा कि बिना मेरिट पर अंतिम राय व्यक्त किए, अभियुक्त को सजा निलंबन का लाभ दिया जाना न्यायसंगत होगा।

