पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ते संघर्ष के बीच ईरान की राजधानी तेहरान में एक तेल भंडारण सुविधा के ऊपर आग की लपटों के गुबार उठते दिखाई दिए और इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सप्ताह भर से जारी युद्ध के अगले चरण में ‘‘कई आश्चर्यजनक कदम उठाए जाने’’ की चेतावनी दी।
इजराइल की सेना ने पुष्टि की कि उसने तेहरान में ईंधन भंडारण केंद्रों पर हमला किया।
ऐसा प्रतीत होता है कि युद्ध में पहली बार किसी असैन्य औद्योगिक प्रतिष्ठान को निशाना बनाया गया है। सरकारी मीडिया ने राजधानी और उत्तर में पड़ोसी प्रांतों को आपूर्ति करने वाले इस केंद्र पर हमलों के लिए ‘‘अमेरिका और यहूदी शासन’’ को जिम्मेदार ठहराया।
नेतन्याहू ने शनिवार रात कहा कि ईरान में युद्ध के अगले चरण के लिए इजराइल के पास ‘‘कई आश्चर्यजनक कदमों की एक सुनियोजित योजना’’ है। उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य ईरान में शासन को अस्थिर करना और परिवर्तन को संभव बनाना है।
इससे पहले, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने पड़ोसी देशों पर हमलों के लिए शनिवार को माफी मांगी जबकि इस बीच उनके देश ने खाड़ी अरब देशों पर मिसाइल और ड्रोन दागना जारी रखा। ईरान के कट्टरपंथियों ने जोर देकर कहा कि तेहरान की युद्ध रणनीति नहीं बदलेगी।
युद्ध में तनाव कम करने की कोशिश करने वाले नेताओं और अमेरिका एवं इजराइल से लड़ाई के लिए प्रतिबद्ध अन्य कट्टरपंथियों के बीच मतभेद किसी भी कूटनीतिक प्रयास को जटिल बना सकते हैं। युद्ध के दौरान शुरुआती हवाई हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के मारे जाने के बाद से ईरान की निगरानी कर रही नेतृत्व परिषद के तीन सदस्यों में से दो की ओर से परस्पर विरोधी बयान आए।
पेजेश्कियान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बिना शर्त आत्मसमर्पण की मांग खारिज कर दी।पेजेश्कियान ने कहा, ‘‘यह एक ऐसा सपना है, जिसे उन लोगों को अपने साथ कब्र में ले जाना चाहिए।
पेजेश्कियान के संदेश के तुरंत बाद, ट्रंप ने शनिवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में चेतावनी दी कि युद्ध में और भी ईरानी अधिकारी निशाने पर आएंगे। उन्होंने लिखा, ‘‘आज ईरान पर जबरदस्त प्रहार किया जायेगा।
ट्रंप ने अपनी वेबसाइट ‘ट्रुथ सोशल’ पर ये टिप्पणियां कीं, जिसमें उन्होंने तेहरान के हमलों को लेकर ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान द्वारा पड़ोसी देशों से माफी मांगने का जिक्र किया।
उन्होंने लिखा, ‘‘ईरान के खराब व्यवहार के कारण अब ऐसे इलाकों और लोगों के समूहों को भी निशाना बनाने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है, जिन्हें निशाना बनाने के बारे में अब तक नहीं सोचा गया था।
Trump wasn't kidding when he said Iran was going to get hit very hard today pic.twitter.com/DLur96bKri
— Ryan Saavedra (@RyanSaavedra) March 7, 2026
ईरानी राष्ट्रपति ने हमलों को लेकर खाड़ी अरब देशों में बढ़ते आक्रोश को शांत करने की कोशिश की। वहीं कुछ ही घंटे पहले, मिसाइल और ड्रोन हमलों ने दुबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उड़ानों को बाधित किया। सऊदी अरब की एक प्रमुख तेल इकाई को निशाना बनाया गया और बहरीन में कई बार लोगों को जान बचाने के लिए भागने पर मजबूर कर दिया।
पेजेश्कियान का संदेश पेशेवर प्रसारण उपकरणों के बिना जल्दबाजी में रिकॉर्ड किया गया प्रतीत होता है। यह एक बार फिर इस बात को रेखांकित करता है कि ईरान के नेताओं का अपने उस अर्धसैनिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड पर सीमित प्रभाव है, जो इजराइल और अन्य देशों को निशाना बनाने वाली मिसाइल को नियंत्रित करता है। यह रिवॉल्यूशनरी गार्ड केवल खामेनेई के प्रति जवाबदेह था और अब संघर्ष बढ़ने के साथ-साथ अपने लक्ष्य स्वयं चुनता प्रतीत हो रहा है।
ईरान की नेतृत्व परिषद के एक अन्य सदस्य और कट्टरपंथी न्यायपालिका प्रमुख गुलाम हुसैन मोहसिनी-एजेई ने संकेत दिया कि युद्ध रणनीति नहीं बदलेगी।
उन्होंने ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘क्षेत्र के कुछ देशों का भूगोल-प्रत्यक्ष और परोक्ष, दोनों तरह से – दुश्मन के हाथ में है और उन स्थानों का इस्तेमाल हमारे देश के खिलाफ आक्रामक कार्रवाइयों में किया जा रहा है। इन लक्ष्यों पर तीव्र हमले जारी रहेंगे।
ईरान की संसद के अध्यक्ष और रिवॉल्यूशनरी गार्ड के पूर्व जनरल मोहम्मद बाघेर गालिबफ ने ‘एक्स’ पर कहा, ‘‘जब तक क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों की मौजूदगी जारी रहेगी, तब तक ये देश शांति से नहीं रह सकेंगे।
ईरान के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी अली लारिजानी ने शनिवार देर रात सरकारी मीडिया द्वारा प्रसारित एक संबोधन में कहा, ‘‘हमारे नेता इस मुद्दे पर एकजुट हैं और उनमें आपस में कोई मतभेद नहीं है।
इस बीच ट्रंप ने कहा कि उन्होंने कुर्द लड़ाकों के युद्ध में शामिल करने की संभावना खारिज कर दी है, हालांकि क्षेत्र में ये लड़ाके ईरानी सरकार को गिराने के प्रयासों में मदद करने को तैयार हैं।
ट्रंप ने ‘एयर फोर्स वन में संवाददाताओं से कहा, ‘‘कुर्द लड़ाकों को शामिल करने के बिना पहले से ही युद्ध काफी जटिल है।
इन देशों के अधिकारियों के अनुसार, इस लड़ाई में ईरान में कम से कम 1,230 लोग, लेबनान में 200 से अधिक और इजराइल में 11 लोग मारे गए हैं। छह अमेरिकी सैनिक भी मारे गए हैं।
शनिवार सुबह, ईरान से मिसाइल दागे जाने के कारण पूरे इजराइल में लोग बचने के लिए आश्रयों की ओर भागे। इस बीच यरुशलम में जोरदार धमाके सुनाई दिए। इजराइल की आपातकालीन सेवाओं ने तत्काल किसी के हताहत होने की सूचना नहीं दी। संघर्ष बढ़ने के साथ ही ईरान ने खाड़ी देशों पर हमले किए।
दुबई में शनिवार सुबह कई धमाकों की आवाज सुनी गई और सरकार ने हवाई सुरक्षा प्रणाली सक्रिय कर दी। अलर्ट बजने के बाद दुबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उड़ानों का इंतजार कर रहे यात्रियों को विशाल हवाई अड्डे की सुरंगों में ले जाया गया।
कतर के ऊर्जा मंत्री साद अल-काबी ने ‘फाइनेंशियल टाइम्स’ को दिए एक साक्षात्कार में चेतावनी दी कि युद्ध ‘‘दुनिया की अर्थव्यवस्थाओं को ध्वस्त कर सकता है’’ और खाड़ी देशों के ऊर्जा निर्यात में व्यापक रुकावट की भविष्यवाणी की, जिससे तेल की कीमत 150 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती है।
ईरान समर्थित चरमपंथी समूह हिजबुल्ला ने कहा कि उसके लड़ाकों की पूर्वी लेबनान के पहाड़ों में शुक्रवार देर रात उतरे इजराइली बल के साथ झड़प हुई।
लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि पूर्वी शहर नबी चित और आसपास के इलाकों पर इजराइली हवाई हमलों में 41 लोग मारे गए और 40 घायल हुए। लेबनानी सेना ने कहा कि मृतकों में उसके तीन सैनिक भी शामिल हैं।
इजराइल ने इस संघर्ष की जिम्मेदारी नहीं ली और उसकी सेना ने टिप्पणी के लिए किए गए अनुरोधों का तुरंत जवाब नहीं दिया।




