लखनऊ, उत्तर प्रदेश के आयुष विभाग में स्थानांतरण नीति 2025 को लेकर मचे विवाद ने तूल पकड़ लिया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ के सख्त रुख के बाद पूरे विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि बिना ठोस कारण बताए किसी डॉक्टर का स्थानांतरण निरस्त करना कानूनन सही नहीं है।
बीते 21 नवंबर 2025 को डॉ. अरविंद्र कुमार गर्ग की याचिका पर आए फैसले ने आयुष विभाग को बड़ा झटका दिया। इस मामले में याची की ओर से अधिवक्ता अभिनव श्रीवास्तव की जोरदार बहस के बाद न्यायालय ने होमोपैथिक निदेशक द्वारा किए गए स्थानांतरण को “अपरिहार्य कारणों” का हवाला देकर निरस्त किए जाने वाले आदेश को रद्द कर दिया था।
मंत्री के आदेश पर रद्द हुआ था तबादला
जानकारी के अनुसार, स्थानांतरण नीति 2025 के तहत होमोपैथिक निदेशक ने कुछ डॉक्टरों के तबादले किए थे, लेकिन कुछ ही घंटों के भीतर आयुष मंत्री के निर्देश पर उन्हें अपरिहार्य कारण बताते हुए निरस्त कर दिया गया। इस निर्णय को चुनौती देते हुए कई डॉक्टरों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
हाईकोर्ट: कारण बताना अनिवार्य
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में साफ कहा कि जब किसी कर्मचारी का स्थानांतरण उसके स्वयं के अनुरोध पर और नीति के तहत किया गया हो, तो उसे निरस्त करने के लिए ठोस और स्पष्ट कारण बताना अनिवार्य है। “अपरिहार्य परिस्थितियां” जैसे अस्पष्ट शब्द कानूनी कसौटी पर खरे नहीं उतरते।
डॉ. शैलेंद्र कुमार मामले में शासन को 8 हफ्ते का समय
डॉ. अरविंद्र कुमार गर्ग के फैसले के बाद कई अन्य डॉक्टरों ने भी हाईकोर्ट में याचिकाएं दाखिल कीं। इसी क्रम में डॉ. शैलेंद्र कुमार की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने शासन को निर्देश दिया है कि वह 8 सप्ताह के भीतर, डॉ. अरविंद्र कुमार गर्ग के फैसले को ध्यान में रखते हुए, स्थानांतरण आदेश पर पुनः विचार करे।
अब तक न ट्रांसफर, न अपील
सूत्रों के अनुसार, विभाग ने अब तक न तो हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ कोई स्पेशल अपील दाखिल की है और न ही आदेश के अनुरूप याची डॉक्टरों का स्थानांतरण किया गया है, जिससे विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
2024-25 में ट्रांसफर नीति सिर्फ कागजों में
जानकारी के मुताबिक वर्ष 2024 में भी शासन ने स्थानांतरण नीति जारी की थी, डॉक्टरों से आवेदन लिए गए, लेकिन निदेशक स्तर की विसंगतियों के चलते शासन को पूरा सत्र ही ‘सेशन जीरो’ घोषित करना पड़ा। न 2024 में नीति के तहत तबादले हुए और न 2025 में, जबकि दूसरी ओर नीति से इतर आयुष मंत्री के आदेश पर धड़ल्ले से तबादले किए जा रहे हैं।
न्यायालय के सख्त रुख से बढ़ी मुश्किलें
हाईकोर्ट के लगातार हस्तक्षेप से आयुष विभाग की स्थानांतरण प्रक्रिया अब न्यायिक जांच के घेरे में आ गई है। आने वाले दिनों में शासन के लिए इस मामले में संतोषजनक निर्णय लेना बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।




