Wednesday, August 5, 2026
  • About Us
  • Contact Us
  • Home
publicnews360
  • Login
  • होमपेज
  • अयोध्या
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • अंतराष्ट्रीय
  • खेल
  • राजनीति
  • क्राइम
  • व्यापार जगत
No Result
View All Result
  • होमपेज
  • अयोध्या
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • अंतराष्ट्रीय
  • खेल
  • राजनीति
  • क्राइम
  • व्यापार जगत
No Result
View All Result
publicnews360
No Result
View All Result
  • होमपेज
  • अयोध्या
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • अंतराष्ट्रीय
  • खेल
  • राजनीति
  • क्राइम
  • व्यापार जगत

IVF से संतान सुख पाने के इच्छुक जोड़े भ्रूण जांच के लिए एनआईपीजीटी के इस्तेमाल से बचें

ब्यूरो पब्लिकन्यूज़360 by ब्यूरो पब्लिकन्यूज़360
January 3, 2026
in Featured
0
कुशीनगर मेडिकल कॉलेज से नवजात शिशु गायब, पुलिस ने जांच शुरू की

भारत में बड़ी संख्या में जोड़े परिवार बढ़ाने के लिए आईवीएफ जैसी सहायक प्रजनन तकनीक का सहारा लेने को मजबूर हो रहे हैं, ऐसे में देश के प्रमुख प्रजनन एवं भ्रूणविज्ञान विशेषज्ञों ने उस जांच के प्रति आगाह किया है, जिसे भ्रूण को छुए बिना या उनकी बायोप्सी किए बिना ही उनकी आनुवांशिक सेहत का अंदाजा लगाने में मददगार तरीके के रूप में प्रचारित किया जा रहा है।

प्रजनन एवं भ्रूणविज्ञान विशेषज्ञों का कहना है कि ‘नॉन-इनवेसिव प्रीइंप्लांटेशन जेनेटिक टेस्टिंग’ (एनआईपीजीटी) या ‘नॉन-इनवेसिव क्रोमोजोमल स्क्रीनिंग’ (एनआईसीएस) से गलत निदान की आशंका काफी अधिक दर्ज की गई है, जिसके मद्देनजर नियमित नैदानिक उपयोग के लिए इसका इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।

इंडियन सोसाइटी फॉर असिस्टेड रिप्रोडक्शन (आईएसएआर), इंडियन फर्टिलिटी सोसाइटी (आईएफएस) और एकेडमी ऑफ क्लीनिकल एम्ब्रियोलॉजिस्ट (एसीई) ने अपनी तरह के पहले अध्ययन के तहत एनआईपीजीटी की सफलता दर आंकी, ताकि यह निर्धारित किया जा सके कि इसे नैदानिक उपयोग के लिए इस्तेमाल किया जाना चाहिए या नहीं।

यह अध्ययन भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद-राष्ट्रीय प्रजनन एवं बाल स्वास्थ्य अनुसंधान संस्थान (आईसीएमआर-एनआईआरआरसीएच) में वैज्ञानिक डॉ. दीपक मोदी के नेतृत्व में किया गया।

वैश्विक प्रमाणों के विस्तृत विश्लेषण के बाद विशेषज्ञ इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि भारत में एनआईपीजीटी फिलहाल नियमित नैदानिक उपयोग के लिए उपयुक्त नहीं है और इसका इस्तेमाल यह तय करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए कि किस भ्रूण को गर्भ में प्रतिरोपित किया जाए।

डॉ. मोदी बताते हैं कि पारंपरिक आईवीएफ प्रक्रिया में भ्रूण में गुणसूत्र संबंधी विकारों की जांच के लिए प्रीइंप्लांटेशन जेनेटिक टेस्टिंग (पीजीटी-ए) का इस्तेमाल किया जा सकता है, जिसके तहत भ्रूण की बाहरी परत से कुछ कोशिकाएं निकाली जाती हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि यह तकनीकी रूप से जटिल प्रक्रिया है, जो भ्रूण की सुरक्षा को लेकर चिंताएं पैदा करती है।

डॉ. मोदी ने कहा, “ऐसे में एनआईपीजीटी जोड़ों को पीजीटी-ए का एक सरल विकल्प प्रतीत हो सकता है। इसमें कोशिकाओं को हटाने के बजाय, डीएनए के उन छोटे-छोटे टुकड़ों का विश्लेषण किया जाता है, जिन्हें भ्रूण प्रयोगशाला में अपने विकास के समय ‘कल्चर मीडियम’ में छोड़ते हैं।”

‘कल्चर मीडियम’ पोषक तत्वों से भरपूर वह तरल पदार्थ या जेल होता है, जिसका इस्तेमाल प्रयोगशाला में भ्रूण को उनके प्राकृतिक वातावरण से बाहर, लेकिन प्राकृतिक वातावरण जैसी परिस्थितियों में विकसित करने के लिए किया जाता है।

डॉ. मोदी के मुताबिक, चूंकि एनआईपीजीटी में बायोप्सी शामिल नहीं होती, इसलिए इस जांच को अक्सर “सुरक्षित, चीड़-फाड़ रहित और आसान परीक्षण” के रूप में प्रचारित किया जाता है।

उन्होंने कहा कि इस तरह के प्रचार से न सिर्फ मरीज, बल्कि प्रजनन क्लीनिक में भी एनआईपीजीटी को लेकर दिलचस्पी बढ़ी है और हाल के वर्षों में कई निजी प्रयोगशालाओं ने भारत में इस जांच की पेशकश शुरू कर दी है।

डॉ. मोदी के अनुसार, एनआईपीजीटी के बढ़ते इस्तेमाल के बावजूद वैज्ञानिक और नैदानिक ​​समुदाय में इस बात को लेकर अनिश्चितता बरकरार है कि क्या यह जांच ऐसे अहम फैसले लेने के लिए सटीक परिणाम देने में सक्षम है कि इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) पद्धति के तहत प्रयोगशाला में तैयार किस भ्रूण को गर्भ में प्रतिरोपित किया जाना चाहिए और किसे त्याग देना चाहिए।

उन्होंने कहा कि भारत में आईवीएफ तकनीक से गर्भधारण का पूरा खर्च जोड़े ही उठाते हैं, ऐसे में यह और भी अहम हो जाता है कि उन्हें उपलब्ध कराई जाने वाली हर जांच विश्वसनीय, प्रमाणित तथा वास्तव में लाभकारी हो।

डॉ. मोदी ने बताया कि आईएसएआर, आईएफएस और एसीई के विशेषज्ञ पैनल ने विभिन्न पत्रिकाओं में प्रकाशित उन 24 अध्ययनों के आंकड़ों का विश्लेषण किया, जिनमें लगभग तीन हजार ऐसे भ्रूण को शामिल किया गया था, जिनकी जांच एनआईपीजीटी के जरिये की गई थी और जांच के निष्कर्षों की सफलता दर की तुलना बायोप्सी आधारित परीक्षण की सफलता दर से की गई थी।

डॉ. मोदी ने बताया कि पैनल के विश्लेषण में सामने आए निष्कर्षों ने एनआईपीजीटी के नैदानिक इस्तेमाल को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कीं। उन्होंने बताया कि विश्लेषण से पता चला कि एनआईपीजीटी जांच की रिपोर्ट केवल 78 फीसदी मामलों में ही बायोप्सी आधारित पारंपरिक परीक्षण की रिपोर्ट से मेल खाती है, जिसका मतलब यह है कि हर पांच में से एक भ्रूण का चयन गलत हो सकता है।

डॉ. मोदी ने कहा कि सरल भाषा में समझें तो इसका मतलब यह है कि आनुवांशिक रूप से स्वस्थ भ्रूण को गलत रूप से अस्वस्थ करार देते हुए खारिज किया जा सकता है, जबकि विकार वाले भ्रूण को स्वस्थ मानते हुए गर्भ में प्रतिरोपित किया जा सकता है, जिससे गर्भपात और गुणसूत्र संबंधी विकार वाले शिशुओं के जन्म का खतरा बढ़ जाता है।

अध्ययन दल के मुताबिक, विश्लेषण में इस बात का ठोस सबूत नहीं मिला कि एनआईपीजीटी से गर्भधारण की संभावना, जटिलता रहित गर्भावस्था या जीवित शिशु के जन्म दर में कोई सुधार होता है।

शोधकर्ताओं ने इस बात को भी रेखांकित किया कि एनआईपीजीटी प्रोटोकॉल में भ्रूण के विकास के लिए उसे छह दिनों तक ‘कल्चर मीडियम’ में रखने की आवश्यकता होती है, जिसे बड़े अध्ययनों में खराब परिणामों से जोड़ा गया है।

आईएसएआर के निदेशक डॉ. अमित पटकी ने कहा कि विश्लेषण से यह स्पष्ट हो जाता है कि मौजूदा समय में भ्रूण के चयन, रैंकिंग या अस्वीकृति के लिए एनआईपीजीटी का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।

आईसीएमआर-एनआईआरआरसीएच की निदेशक डॉ. गीतांजलि सचदेवा ने कहा कि वैज्ञानिक दृष्टि से दिलचस्प और भविष्य के लिहाज से आशाजनक होने के बावजूद, यह तकनीक अभी तक भ्रूण की किस्मत का निर्धारण करने वाले नैदानिक ​​परीक्षण के लिए आवश्यक मानकों पर खरी नहीं उतरती।

Tags: IVF से संतान सुख पाने के इच्छुक जोड़े
Previous Post

गोरखपुर में पुलिस ने हवाला कारोबार के संदेह में एक व्यक्ति को लिया हिरासत में

Next Post

प्रदेश में बेसिक स्कूलों की जारी हुई 2026 की अवकाश तालिका

Related Posts

एआई-जनित कंटेंट पर लगातार दिखाना होगा पहचान चिन्ह, सुझाव और टिप्पणियां आमंत्रित
Featured

परीक्षण के दौरान AI ने वास्तविक कंप्यूटर प्रणालियों में लगाई सेंध, सुरक्षा को लेकर चिंता

August 4, 2026
बच्चों को जेब खर्च देने का नफा-नुकसान!; रोजमर्रा के काम के बदले भुगतान?
Featured

बच्चों को जेब खर्च देने का नफा-नुकसान!; रोजमर्रा के काम के बदले भुगतान?

August 3, 2026
होर्मुज में तनाव के बीच 14 भारतीय जहाज सुरक्षित निकले
Featured

रूसी सेना के साथ अब भी काम कर रहे करीब दो दर्जन भारतीय, रिहा कराने के प्रयास जारी : विदेश मंत्रालय

August 1, 2026
बिना सिर खोले ब्रेन ट्यूमर हटाया: भारतीय-अमेरिकी आर्मी सर्जन मेजर पटेल की अनोखी तकनीक
Featured

बिना सिर खोले ब्रेन ट्यूमर हटाया: भारतीय-अमेरिकी आर्मी सर्जन मेजर पटेल की अनोखी तकनीक

July 31, 2026
Next Post
SIR के कारण परिषदीय स्कूलों की परीक्षाएं टलीं, अब 10 से 15 दिसंबर तक होगा आयोजन

प्रदेश में बेसिक स्कूलों की जारी हुई 2026 की अवकाश तालिका

Recent Posts

उप्र पुलिस भर्ती परीक्षा के अभ्यर्थियों को रोडवेज बसों में किराये पर 50 प्रतिशत छूट, परीक्षा आठ, नौ और 10 जून को आयोजित

उप्र में 60 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं को रोडवेज बसों में जल्द मिलेगी नि:शुल्क यात्रा, अनुपूरक बजट में मिला 100 करोड़ रुपये

by ब्यूरो पब्लिकन्यूज़360
August 4, 2026
0

लखनऊ, प्रदेश विधानसभा में मंगलवार को पेश किये गये अनुपूरक बजट में राज्य की 60 वर्ष से अधिक उम्र की...

मऊ पुलिस ने फर्जी क्यूआर भुगतान से दुकानदारों को ठगने का आरोपी गिरफ्तार

मऊ पुलिस ने फर्जी क्यूआर भुगतान से दुकानदारों को ठगने का आरोपी गिरफ्तार

by ब्यूरो पब्लिकन्यूज़360
August 4, 2026
0

मऊ, पुलिस ने फर्जी ‘क्यूआर कोड’ और नकली यूटीआर नंबर का उपयोग कर बिना भुगतान किए दुकानदारों से इलेक्ट्रॉनिक सामान...

लखनऊ: थल सैनिक कैंप में NCC ग्रुप लखनऊ की गर्ल्स टीम का जलवा, जीती शूटिंग चैंपियनशिप ट्रॉफी

लखनऊ: थल सैनिक कैंप में NCC ग्रुप लखनऊ की गर्ल्स टीम का जलवा, जीती शूटिंग चैंपियनशिप ट्रॉफी

by Atul Narain Srivastava
August 4, 2026
0

लखनऊ, बरेली में आयोजित दस दिवसीय अंतर-ग्रुप चैंपियनशिप के दौरान एनसीसी ग्रुप लखनऊ की थल सैनिक कैंप (टीएससी) गर्ल्स टीम ने...

सुप्रीमकोर्ट द्वारा असंवैधानिक घोषित कामिल और फाजिल डिग्रियो को योगी ने किया वैध, मिली मंत्रिमंडल की मंजूरी

सुप्रीमकोर्ट द्वारा असंवैधानिक घोषित कामिल और फाजिल डिग्रियो को योगी ने किया वैध, मिली मंत्रिमंडल की मंजूरी

by Atul Narain Srivastava
August 4, 2026
0

लखनऊ, उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल ने उच्चतम न्यायालय द्वारा राज्य मदरसा शिक्षा परिषद की ओर से कामिल और फाजिल डिग्रियां प्रदान...

Ayodhya: रूदौली के कंपोजिट विद्यालय करीमपुर कांड में साजिश रचने वाली शिक्षिका निलंबित

Ayodhya: रूदौली के कंपोजिट विद्यालय करीमपुर कांड में साजिश रचने वाली शिक्षिका निलंबित

by Atul Narain Srivastava
August 4, 2026
0

अयोध्या, विकास खण्ड रूदौली के कंपोजिट विद्यालय करीमपुर कांड मामले में एक शिक्षक के खिलाफ छात्राओं को भड़का कर साजिश...

हमारे बारे में Public News 360

एक विश्वसनीय न्यूज़ चैनल — पढ़ें ताज़ा समाचार, राजनीति, समाज और संस्कृति की खबरें।

संपादकीय जानकारी
प्रकाशक/संपादक:अतुल नारायण श्रीवास्तव
उप संपादक: अनुराग वर्मा
पता: फ़ैज़ाबाद-अयोध्या, उत्तर प्रदेश 224001
हमसे जुड़ें
विश्वसनीयता और पारदर्शिता के साथ।

All disputes Ayodhya jurisdiction only • सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को संसूचित राजपत्र संख्या सी.जी.-डी.एल.-अ.-25022021-225464 दिनांक 25 फरवरी 2021 के भाग II द्वारा संचालित सर्वाधिकार सुरक्षित

  • About Us
  • Contact Us
  • Home

© 2025 publicnews360.in

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password?

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In
No Result
View All Result
  • होमपेज
  • अयोध्या
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • अंतराष्ट्रीय
  • खेल
  • राजनीति
  • क्राइम
  • व्यापार जगत

© 2025 publicnews360.in

×

No WhatsApp Number Found!

Join Our Whatsapp Group