मुंबई, मुंबई के सीएसएमटी रेलवे स्टेशन के पास से मई में अपहृत चार वर्षीय एक बच्ची वाराणसी के एक अनाथालय में पाई गई, जहां से उसे पुलिस ने हिरासत में ले लिया और उसके परिवार को सौंप दिया।
अधिकारी ने बताया कि जांच में पता चला कि अपहरणकर्ता ने बच्ची को सड़क किनारे छोड़ दिया था और एक महिला ने बच्ची को अकेला देखकर उसे उत्तर प्रदेश के शहर स्थित अनाथालय में पहुंचा दिया।
अधिकारी ने बताया कि 23 मई को माता रमाबाई आंबेडकर (एमआरए) मार्ग पुलिस थाने में मामला दर्ज किया गया था, जब 25 साल के एक व्यक्ति ने लड़की का अपहरण कर लिया था। यह घटना उस वक्त हुई थी जब लड़की के माता-पिता मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (सीएसएमटी) स्टेशन के पास सो रहे थे। लड़की के माता-पिता मूलत: पश्चिमी महाराष्ट्र के शोलापुर जिले के रहने वाले हैं।
उन्होंने बताया कि जांच के दौरान, पुलिस ने स्टेशन परिसर में लगे सीसीटीवी फुटेज की जांच की और एक व्यक्ति को बच्चे के साथ जाते हुए देखा।
यह भी पता चला कि अपहरणकर्ता दादर जाने वाली एक लोकल ट्रेन में चढ़ा और कुर्ला में उतरकर लोकमान्य तिलक टर्मिनस (एलटीटी) पहुंचा, जहां से लंबी दूरी की ट्रेन रवाना होती हैं।
उन्होंने बताया कि लड़की को उत्तर प्रदेश ले जाए जाने के संदेह में मुंबई पुलिस की एक टीम ने कई बार वाराणसी की यात्रा की, लेकिन शुरुआत में बच्ची का पता नहीं चल सका।
जांचकर्ताओं ने स्थानीय पुलिस के साथ समन्वय किया और उत्तर प्रदेश के पत्रकारों की भी मदद ली, जिन्होंने एक बच्ची के बारे में जानकारी साझा की, जो बाद में वाराणसी के एक अनाथालय में मिली। अधिकारी ने बताया कि बच्ची को एक महिला वहां लाई थी, जिसने दावा किया था कि उसे वह सड़क किनारे मिली थी।
मुंबई पुलिस की टीम अनाथालय पहुंची और लड़की की पहचान की पुष्टि की। अनाथालय के कर्मचारियों ने उसका नाम ‘काशी’ रखा था, उन्हें पता नहीं था कि उसका मुंबई से अपहरण हुआ है। उन्होंने बताया कि उसके माता-पिता से संपर्क किया गया और वीडियो कॉल पर उसकी पहचान की गई।
उन्होंने बताया कि लड़की को बृहस्पतिवार को हिरासत में लेकर वाराणसी की बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) के समक्ष पेश किया गया, जिसने अधिकारियों को उसे वापस महाराष्ट्र भेजने का निर्देश दिया। अधिकारी ने बताया कि अपहरणकर्ता की तलाश अभी जारी है।




