अयोध्या में तिलोद की गंगा (तिलैया नाला) जो कि समदा झील से उद्गम होकर संभावित रूप से 46 किलोमीटर चलकर लुप्तप्राय हो जाती है, के जीर्णोधार कार्य का निरीक्षण CDO द्वारा किया गया।
सभी संबंधित अधिकारियों को को ngt के आदेशो के अनुसार आवश्यक दिशा निर्देश दिए गए।
AI और सूत्रों ने बताया तिलोद की गंगा, जिसे तिलैया नाला भी कहा जाता है, एक ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व की जलधारा है। इसका उद्गम समदा झील से माना जाता है, जो अयोध्या के निकट स्थित है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस नदी का संबंध भगवान राम से जोड़ा जाता है।
कहा जाता है कि राम ने सिंधु देश के घोड़ों के लिए पानी की व्यवस्था हेतु इस जलधारा का निर्माण कराया था। इसका पानी काले तिल के रंग जैसा होने के कारण इसे “तिलोदकी गंगा” नाम मिला।
यह जलधारा समदा झील से शुरू होकर लगभग 46 किलोमीटर तक बहती है, लेकिन समय के साथ अतिक्रमण, प्रदूषण और उपेक्षा के कारण यह कई स्थानों पर लुप्तप्राय हो गई है।
वर्तमान में अयोध्या प्रशासन द्वारा इसके जीर्णोद्धार और संरक्षण के प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि इसके ऐतिहासिक स्वरूप को पुनर्जनन दिया जा सके और जलभराव की समस्या का समाधान हो सके। इस प्रक्रिया में नदी को आसपास के कुंडों और तालाबों से जोड़ने की योजना भी शामिल है।


