उन्नाव, कानपुर बिल्हौर के नानामऊ घाट पर गंगा स्नान करते समय डूबे बनारस में तैनात उपनिदेशक स्वास्थ्य का 36 घंटे बाद भी कुछ पता नहीं चल सका। 40 किलोमीटर के दायरे में 36 घंटे तक एसडीआरएफ और पीएसी की रेस्क्यू टीम तलाश में लगी रहीं। शाम तक नतीजा निकलता न देख एनडीआरएफ की 30 सदस्यीय टीम ने रात में सर्च अभियान शुरू किया।
बेहटामुजावर थाना क्षेत्र के ग्राम कबीरपुर खंभौली निवासी रमेशचंद्र के बेटे उपनिदेशक स्वास्थ्य डॉ. आदित्यवर्धन सिंह (44) शनिवार सुबह बांगरमऊ क्षेत्र के पतसिया गांव निवासी दोस्त योगेश्वर मिश्र और लखनऊ के इंद्रानगर में रहने वाले साथी प्रदीप तिवारी के साथ कार से गंगा स्नान करने बिल्हौर के नानामऊ घाट आए थे। नदी का बहाव तेज होने से डॉ. आदित्यवर्धन का पैर फिसला गया था और वह गहरे पानी में चले गए थे।
कानपुर पुलिस आयुक्त ने जानकारी होने के बाद तलाश में जुटी गोताखोरों और पीएसी की 12 सदस्यीय रेस्क्यू टीम को तलाश में लगाया था। बाद में एसडीआरएफ (राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल) की 12 सदस्यीय टीम को लगाया लेकिन 36 घंटे बीतने के बाद भी शाम सात बजे तक कुछ पता नहीं चल पाया। रविवार को एसडीआरएफ ने सुबह आठ बजे से शाम छह बजे नानामऊ घाट से गंगा बैराज तक करीब 40 किलोमीटर के दायरे में तलाश की लेकिन निराशा ही हाथ लगी।
अब कानपुर आयुक्त ने डॉ. आदित्यवर्धन की तलाश के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) को लगाया है। दीपक कुमार कमालिया के नेतृत्व में आई 30 सदस्यीय टीम में एसएसआई सुंदरलाल, हेड कांस्टेबल मन्नू सहित अन्य सदस्यों ने रात में सर्च अभियान शुरू किया। शुरुआती 30 मिनट तक सर्च अभियान में कुछ हाथ नहीं लगा है।
गंगा में डूबे डॉ. आदित्यवर्धन माता-पिता की इकलौते बेटे हैं। एक बहन प्रज्ञा है और वह आस्ट्रेलिया में इंजीनियर हैं। मां शशिप्रभा और पिता रमेशचंद्र मौजूदा समय में उसी के पास आस्ट्रेलिया में हैं। डॉ. आदित्यवर्धन के चचेरे भाई आईएएस अनुपम सिंह ने दोनों को सूचना दे दी है। बताया जा रहा है कि पत्नी भी आ रही हैं और वह रास्ते में हैं। माता-पिता और बहन को आने में दो दिन से अधिक का समय लग सकता है। इसलिए उनके भी सोमवार तक आने की उम्मीद है। एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की तलाश के दौरान पूरे समय चचेरे भाई मौके पर मौजूद रहे।
डॉ. आदित्यवर्धन के ताऊ शिवकुमार सिंह भी आईएएस बेटे के साथ गांव आ गए हैं। वह पैतृक आवास पर रुककर वहां से पूरी जानकारी कर रहे हैं। वह मौके पर भी गए थे। देर शाम जब लौटकर आए तो पड़ोसी उनके साथ बैठ गए और जानकारी लेते रहे।
ग्रामीणों के मुताबिक, गंगा स्नान के बाद उनके गांव आने की सूचना मिली थी। डॉ. आदित्यवर्धन से मिलने को वह सभी उत्साहित थे। उनके आने के स्थान पर गंगा में डूबने की खबर आई।


