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डिप्रेशन क्‍या और क्‍यों होता है, साइकोथेरेपी दवाओं से बेहतर उपचार हो सकता है?

क्यों अवसाद के लिए साइकोथेरेपी दवाओं से बेहतर उपचार हो सकता है

admin by admin
June 3, 2024
in Featured, देश
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साइकोथेरेपी’ सत्र के दौरान, मेरे एक मरीज ने मुझे बताया कि उसके चिकित्सक द्वारा निर्धारित अवसादरोधी दवाओं ने उसकी “इच्छाओं को मार दिया है”। उसने मुझे बताया कि भीतर से वह मृत जैसा महसूस कर रहा है।

दुर्भाग्य से, यह कोई अकेला मामला नहीं था। मैंने कई रोगियों से अवसादरोधी दवाओं के प्रभावों के बारे में इसी तरह के विवरण सुने हैं। कई रोगी कहते हैं कि वे ‘जॉम्बी’ की तरह महसूस करते हैं।

हालांकि, कुछ मरीजो का कहना है कि ये दवाइयां उनके मानसिक स्वास्थ्य के प्रबंधन में सहायक हैं, यहां तक ​​कि आवश्यक हैं।

अवसादरोधी दवाएं, जिन्हें सेलेक्टिव सेरोटोनिन रूप्टेक इनहिबिटर (एसएसआरआई) के रूप में जाना जाता है, और लोकप्रिय व्यग्रता-निवारक दवा बेंजोडायजेपाइन्स, मानसिक स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याओं से पीड़ित लोगों को आशा की किरण दिखा सकती है।

वे रोगियों को आत्मविश्वास, आशावाद और ठीक होने की अपनी क्षमता में विश्वास की भावना को बढ़ावा देने में भी मदद कर सकते हैं। कुछ रोगियों को लगता है कि दवा बेहतर स्वास्थ्य के लिए एक महत्वपूर्ण माध्यम के तौर पर कार्य करती है।

अन्य रोगियों की शिकायत है कि दवा के प्रतिकूल प्रभाव, जिसमें मतली, सिरदर्द, उनींदापन, चक्कर आना, थकान, बेचैनी, घबराहट और कमजोरी शामिल हो सकते हैं, अवसाद और चिंता के लक्षणों से भी बदतर हो सकते हैं।

इनमें से कई प्रतिकूल प्रभावों को दवा उद्योग द्वारा अच्छी तरह से प्रलेखित किया गया है और दवाओं के पैकेटों में दिशानिर्देशों में छोटे अक्षरों में लिखा गया है।

लेकिन, आम तौर पर चिकित्सक द्वारा इन्हें लिख कर नहीं बताया जाता। इनमें से कुछ दुष्प्रभाव दवा लेने के कुछ सप्ताह या महीनों बाद खत्म हो जाते हैं।

हालांकि, लेखक और मनोचिकित्सक डेविड हीली जैसे अन्य लोगों का तर्क है कि इससे मरीजों के जीवन की गुणवत्ता में भारी कमी आ सकती है।

उदाहरण के लिए कुछ कम सामान्य – लेकिन अधिक प्रभावशाली प्रतिकूल प्रभावों ने विवाद और आलोचना को आकर्षित किया है। मरीजों ने अनिद्रा, यौन रोग, एनोरेक्सिया, मतिभ्रम और आत्महत्या के विचारों के बारे में जानकारी दी है।

कुछ अवसादरोधी दवाओं में दवा का उपयोग करते समय आत्महत्या के बढ़ते जोखिम के बारे में ‘ब्लैक बॉक्स चेतावनी’ होती है।

यह जरूरी है कि मरीजों को अवसादरोधी दवाओं के संभावित जोखिमों और दुष्प्रभावों के बारे में पूरी जानकारी दी जाए और इन दवाओं के सेवन से उनके व्यवहार में होने वाले बदलावों पर बारीकी से नजर रखी जाए।

शोध से पता चलता है कि अध्ययन किए गए मरीजों में से केवल एक प्रतिशत से भी कम मरीजों को दवा लिखने वाले व्यक्ति द्वारा इन दवाओं के प्रतिकूल प्रभावों या निर्भरता के बारे में कुछ भी बताया गया था।

जबकि अध्ययनों से पता चलता है कि कुछ अवसादरोधी और व्यग्रता-रोधी दवाएं नशे की लत पैदा करती हैं, दवा कंपनियां इस बात पर जोर देती हैं कि इन आदतों को निर्भरता समझ लिया जाता है।

इन दवाओं को छह महीने तक की छोटी अवधि के लिए अनुशंसित किया जाता है – लेकिन रोगियों को इन्हें कई वर्षों तक लेना पड़ सकता है। कुछ रोगियों ने बताया कि उन्होंने खुराक में कमी या उपचार योजना के अंत के बारे में अपने चिकित्सक से कोई परामर्श नहीं लिया है।

अधिकांश मामलों में रोगियों के लिए अनिश्चित काल तक अवसादरोधी दवाएं लेना लाभदायक नहीं होता, इसलिए दवा पर शरीर की निर्भरता को नियंत्रित करने की योजना आवश्यक है। अवसादरोधी दवाओं पर निर्भरता को कम करने के दुष्प्रभावों में चक्कर आना, सिर चकराना, फ्लू जैसे लक्षण, सुस्ती और नींद में गड़बड़ी शामिल हो सकते हैं। चिंता, बेचैनी, रोने के दौरे और चिड़चिड़ापन सहित मनोवैज्ञानिक गड़बड़ी की भी जानकारी सामने आई हैं।

चिकित्सक अवसादरोधी दवा पर निर्भरता को कम करने के प्रभावों को अवसाद के लक्षणों की वापसी के रूप में व्याख्या कर सकते हैं, और ग्राहकों को फिर से दवा देना शुरू कर सकते हैं – और, कुछ मामलों में, इसे बढ़ा भी सकते हैं। इसके बाद फिर, रोगी लक्षणों, दुष्प्रभावों, बीमारी और दवा समायोजन के चक्र में फंस सकता है।

केवल दवा से उपचार करने के दौरा व्यक्ति के महत्वपूर्ण पहलुओं को नजरअंदाज कर दिया जाता है, तथा स्वयं के सुधार में उनकी भूमिका पर जोर नहीं दिया जाता है।

‘साइकोथेरेपिस्ट’ मरीज के साथ मिलकर बीमारी के लक्षणों और दवा के दुष्प्रभावों के बीच अंतर कर सकता है, तथा यह बता सकता है कि क्या ‘‘इलाज’’ है और क्या ‘‘ज़हर’’ है।

Tags: डिप्रेशन क्‍या और क्‍यों होता है
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