भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के एक दल ने शुक्रवार को मध्य प्रदेश के आदिवासी बहुल धार जिले में स्थित विवादास्पद भोजशाला/कमाल मौला मस्जिद परिसर का सर्वेक्षण शुरू किया।
एएसआई के दल में 10 से अधिक सदस्य शामिल हैं। एएसआई का यह दल सुबह परिसर में पहुंची, इस दल के साथ स्थानीय पुलिस और जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी भी थे।
मामले में याचिकाकर्ताओं में से एक आशीष गोयल एएसआई के दल के साथ मौजूद थे। गोयल ने संवाददाताओं को बताया कि एएसआई दल ने दोपहर तक काम किया और फिर परिसर से चला गया।
हिंदू और मुस्लिम दोनों ही इस स्थल को उपासना स्थल मानते हैं।
यह पूछे जाने पर कि क्या मुसलमानों को स्थल पर उपासना करने की अनुमति दी जाएगी, धार के पुलिस अधीक्षक (एसपी) मनोज कुमार सिंह ने कहा कि मंगलवार को पूजा और शुक्रवार को नमाज प्रथा के अनुसार आयोजित की जाएगी। एसपी ने कहा कि वह इस मामले पर एएसआई अधिकारियों के साथ चर्चा करेंगे और आस्था से जुड़ी गतिविधियों के लिए पर्याप्त व्यवस्था करेंगे।
गोयल ने कहा कि भोजशाला परिसर का सर्वेक्षण करने के लिए 15 सदस्यीय दल सुबह-सुबह स्थल पर पहुंचा। उन्होंने कहा कि उनके जैसे याचिकाकर्ताओं का प्रतिनिधित्व करने वाले एक प्रमुख संगठन हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस के सदस्य भी सर्वेक्षण के दौरान मौजूद थे।
गोयल ने कहा, ‘‘आज उन्होंने सर्वे कराने के लिए जमीनी स्तर पर तैयारी की। उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार, दल द्वारा जीपीएस और कार्बन-डेटिंग उपकरण जैसी नयी तकनीकों का उपयोग किया गया।
हालांकि, प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि इस मौके पर मुस्लिम समुदाय के लोग मौजूद नहीं थे। मुस्लिम समुदाय के सदस्यों ने प्रथा के अनुसार, भारी पुलिस मौजूदगी के बीच स्थल पर शुक्रवार की नमाज अदा की।
इससे पहले एसपी सिंह ने कहा कि भोजशाला में सर्वेक्षण शुरू हो गया है। उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘हमने एएसआई दल को इसके संचालन के लिए साजो-सामान संबंधी समस्त आवश्यक सहायता प्रदान की है। इस कार्य के दौरान सुरक्षा के लिए पर्याप्त कदम उठाए गए हैं और शहर में शांति है।
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि घटनास्थल पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।
इस बीच, इस मुद्दे पर उच्चतम न्यायालय में उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ मुस्लिम समुदाय द्वारा दायर एक विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) एक अप्रैल को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध की गई है।
‘हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस’ का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील शिरीष दुबे ने संवाददाताओं से कहा कि जैसा कि उनके वकीलों ने उल्लेख किया है, उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को मामले की सुनवाई करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार सर्वेक्षण जारी रहेगा।
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने 11 मार्च को एएसआई को धार जिले के विवादास्पद भोजशाला परिसर का छह सप्ताह के भीतर वैज्ञानिक सर्वेक्षण करने का निर्देश दिया था।
एएसआई के संरक्षित ऐतिहासिक भोजशाला परिसर को हिन्दू वाग्देवी (सरस्वती) का मंदिर मानते हैं, जबकि मुस्लिम समुदाय इसे कमाल मौला की मस्जिद बताते हैं।
एएसआई के सात अप्रैल 2003 को जारी एक आदेश के तहत हिंदुओं को प्रत्येक मंगलवार भोजशाला में पूजा करने की अनुमति है जबकि मुसलमानों को हर शुक्रवार को इस जगह नमाज अदा करने की इजाजत दी गई है।
बाद में पत्रकारों से बात करते हुए धार के शहर काजी वकार सादिक ने कहा कि सर्वेक्षण के दौरान मुस्लिम समुदाय का कोई भी अधिकृत सदस्य मौजूद नहीं था, हालांकि कमाल मौला मस्जिद के प्रतिनिधि अब्दुल समद को वहां मौजूद रहना था।
सादिक ने दावा किया, लेकिन ऐसा लगता है कि एएसआई ने उन्हें कोई नोटिस नहीं दिया है और इसके लिए केंद्रीय एजेंसी जिम्मेदार है। सादिक ने कहा कि 1902 और 1903 की एएसआई रिपोर्ट उसके रिकॉर्ड में हैं और स्थल पर पहली रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि ‘‘यह एक मस्जिद है।
उन्होंने कहा, ‘‘वर्ष 1998 में बजरंग दल और अन्य हिंदू संगठनों की ओर से विमल कुमार गोधा द्वारा उच्च न्यायालय में फिर से एक याचिका दायर की गई। तब अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री थे। उस समय जवाब दाखिल किया गया था कि यह कमाल मौला मस्जिद है और भोजशाला का अस्तित्व एक रहस्य है।
उन्होंने कहा कि यह जवाब उच्च न्यायालय के रिकॉर्ड में है और एएसआई इस मुद्दे पर अपने रुख से पीछे नहीं हट सकता।
उच्चतम न्यायालय द्वारा उल्लेख किए जाने के बाद भी मामला सुनवायी के लिए नहीं लिये जाने पर उन्होंने कहा कि तारीखें आगे-पीछे होती रहती हैं और समुदाय को सुनवायी का मौका मिलेगा।
सादिक ने कहा कि उनके पास यह दिखाने के लिए दस्तावेज हैं कि उस स्थान पर दिन में पांच बार नमाज पढ़ी जा सकती है, लेकिन उन्होंने शांति और सद्भाव के हित में खुद को रोक लिया है।
इस बात पर जोर देते हुए कि हिंदुओं के साथ कोई विवाद नहीं है, उन्होंने कहा, ‘‘केवल 13-14 लोग, जो समुदाय के स्वयंभू नेता हैं, समस्याएं पैदा कर रहे हैं। अब हम सोचते हैं कि हमें उस जगह पर दिन में पांच बार नमाज शुरू करने पर जोर देना होगा। हम इस पर उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय जाएंगे।
उन्होंने कहा कि 1902 के सर्वेक्षण के दौरान जो कुछ मौजूद था वह आज भी मौजूद होगा। उन्होंने कहा, ‘अगर कुछ भी नया मिलेगा तो एएसआई पूरी पारदर्शिता के साथ उसका खुलासा करेगी।
उन्होंने कहा कि देश में प्रगति और शांति के लिए परंपरा के मुताबिक इस स्थल पर नमाज अदा की जाएगी।
सादिक ने कहा कि कमाल मौला मस्जिद के प्रतिनिधियों सहित उनके समुदाय के नेता इस मामले पर फैसला लेने के लिए जल्द ही बैठक करेंगे।


