नई दिल्ली, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने मुंबई स्थित कंपनी आईएल एंड एफएस एनर्जी डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड और उसके प्रबंध निदेशकों व अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ 212.34 करोड़ रुपये के कथित बैंक धोखाधड़ी मामले में मुकदमा दर्ज किया है।
बैंक की शिकायत पर दर्ज इस मामले में सीबीआई ने मुंबई, दिल्ली और नोएडा सहित कई स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया। जांच के दौरान बैंक से जुड़े दस्तावेज, जमा पर्चियां, म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो से संबंधित कागजात और कंपनी के खातों व संपत्तियों का विवरण बरामद कर जब्त किया गया है।
सीबीआई की ओर से 24 अक्टूबर 2026 को जारी प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, यह मामला केनरा बैंक की बांद्रा ईस्ट, मुंबई स्थित सर्किल ऑफिस की शिकायत पर दर्ज किया गया है। आरोपियों में कंपनी के प्रबंध निदेशक और निदेशक सुनील वाधवा, अनूप सेठ, हरी सहगल और रमेश चंद्र बावा के नाम शामिल हैं। इसके अलावा अरुण कुमार साहा, अज्ञात सरकारी कर्मचारियों और अन्य अज्ञात निजी व्यक्तियों को भी मामले में आरोपी बनाया गया है।
शिकायत के अनुसार, आरोपियों ने कथित तौर पर आपराधिक साजिश के तहत तत्कालीन सिंडिकेट बैंक की मुंबई स्थित एलसीबी शाखा से 100 करोड़ रुपये का टर्म लोन और लंदन शाखा से 5 करोड़ अमेरिकी डॉलर की राशि प्राप्त की थी। आरोप है कि कंपनी ने स्वीकृत उद्देश्य के अनुरूप बैंक की धनराशि का इस्तेमाल नहीं किया और संबंधित रकम को सहयोगी कंपनियों के माध्यम से दूसरी जगह भेज दिया। इससे शिकायतकर्ता बैंक को करीब 212.34 करोड़ रुपये का कथित नुकसान हुआ।
सीबीआई ने बताया कि मामले में 21 अक्टूबर 2026 को मुकदमा दर्ज किए जाने के बाद कंपनी के प्रबंध निदेशकों और निदेशकों से जुड़े मुंबई, दिल्ली और नोएडा सहित कई ठिकानों पर तलाशी ली गई। इस दौरान जांच से संबंधित दस्तावेज बरामद किए गए, जिन्हें जब्त कर लिया गया है।
एजेंसी अब कथित धोखाधड़ी की पूरी प्रक्रिया, इसमें शामिल लोगों की भूमिका और ऋण की रकम के अंतिम इस्तेमाल का पता लगाने में जुटी है। जांच में सरकारी कर्मचारियों और निजी व्यक्तियों की संभावित भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है। फिलहाल मामले में लगाए गए आरोप जांच का विषय हैं और आरोपियों के दोषी होने का अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के तहत होगा।
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