गोरखपुर जिले के गोला क्षेत्र में एक गाय के रेबीज से संक्रमित होने की आशंका के बीच उसके दूध से बना चरणामृत पीने वाले करीब 450 लोगों को एहतियातन रेबीज रोधी टीका लगाया गया।
गाय की मंगलवार शाम को मौत हो गई थी। अधिकारियों के मुताबिक, स्वास्थ्य विभाग ने घटना के बाद बुधवार को दादी खास गांव में टीकाकरण शिविर लगाया।
उन्होंने बताया कि इससे पहले मंगलवार को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में करीब 50 लोगों को टीका लगाया गया था, जबकि बुधवार को शिविर में लगभग 400 लोगों का टीकाकरण किया गया।
गाय के मालिक नवमी यादव ने बताया कि उन्हें जानकारी नहीं थी कि किसी आवारा कुत्ते ने उनकी गाय को काटा था।
उन्होंने बताया कि गाय पिछले एक-दो दिन से अस्वस्थ थी और मंगलवार को उसकी हालत बिगड़ गई। नवमी यादव ने बताया कि इसके बाद उन्होंने निजी पशु चिकित्सकों बेचने सिंह और हरदेव यादव के अलावा दादी खास स्थित पशु अस्पताल के चिकित्सक से भी सलाह ली थी।
यादव के अनुसार, पशु चिकित्सकों ने गाय को कुत्ते के काटने की आशंका जताई थी। यादव ने बताया कि उनकी गाय असामान्य व्यवहार करने के साथ कुत्ते के भौंकने जैसी आवाजें निकालने लगी थी और आखिरकार उसकी मौत हो गई।
उन्होंने बताया कि गाय के दूध से दुर्गा पूजा के दौरान चरणामृत तैयार किया गया था, जिसे गांव के श्रद्धालुओं ने ग्रहण किया था।
यादव ने बताया कि गाय का दूध दो दुकानों और कई घरों में भी पहुंचाया गया था। इससे दादी खास और पड़ोसी गांव गोविंदपुर के लोगों में चिंता फैल गई और वे टीका लगवाने के लिए स्वास्थ्य केंद्र पहुंचने लगे।
दादी स्थित पशु अस्पताल में तैनात पशु चिकित्सक सिद्दीकी ने बताया कि गाय के लक्षणों से उसके रेबीज वायरस से संक्रमण की आशंका हुई थी, लेकिन केवल लक्षणों के आधार पर बीमारी की पुष्टि नहीं की जा सकती और इसके लिए उचित पशु चिकित्सकीय जांच जरूरी है।
विशेषज्ञों के अनुसार, केवल दूध पीने से रेबीज फैलने का जोखिम स्थापित नहीं है। इसके साथ उन्होंने यह भी कहा कि चरणामृत में इस्तेमाल किए गए दूध के संक्रमित पशु की लार के संपर्क में आने की आशंका को देखते हुए संबंधित लोगों को चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।