गाजीपुर, करीब 132 साल पहले भारत छोड़कर सूरीनाम में बस गए रामनंदन के वंशज अब अपनी जड़ों की तलाश में उत्तर प्रदेश के गाजीपुर पहुंचे हैं। पीढ़ियों से सूरीनाम में रह रहे इस परिवार को अपने पूर्वजों के बारे में बहुत कम जानकारी थी। अब परिवार ने अपने पुरखों की जन्मभूमि और भारत में बचे रिश्तेदारों का पता लगाने की कोशिश शुरू की है।
रामनंदन भारत छोड़कर सूरीनाम चले गए थे और वहीं बस गए। समय बीतने के साथ उनकी अगली पीढ़ियों का अपने भारतीय मूल से संपर्क और जानकारी सीमित होती गई। परिवार के मन में यह जानने की इच्छा बढ़ी कि भारत में उनके पूर्वजों का परिवार कहां रहता था और आज उनकी पीढ़ी में कौन-कौन लोग मौजूद हैं। इसी तलाश में परिवार भारत पहुंचा और गाजीपुर जिले के खानपुर गांव जाकर स्थानीय लोगों से मुलाकात की।
अपने भारतीय रिश्तेदारों की पहचान करने के लिए परिवार ने वाराणसी स्थित ‘ज्ञान लैब’ में डीएनए जांच की प्रक्रिया शुरू कराई है। परिवार को उम्मीद है कि डीएनए मिलान के जरिए पूर्वी उत्तर प्रदेश, खासकर गाजीपुर में रहने वाले संभावित रिश्तेदारों का पता लगाया जा सकेगा।
प्रोफेसर ज्ञानेश्वर चौबे के मुताबिक, सूरीनाम से आए परिवार के सदस्यों और संभावित भारतीय रिश्तेदारों के ब्लड सैंपल लेकर प्रयोगशाला में डीएनए निकाला जाएगा। इसके बाद माइटोकॉन्ड्रियल डीएनए, वाई-क्रोमोसोम और ऑटोसोमल डीएनए का विश्लेषण किया जाएगा। इन जांचों के जरिए दोनों परिवारों के बीच संभावित जैविक संबंधों का पता लगाने में मदद मिल सकती है।
प्रोफेसर चौबे ने बताया कि जांच के लिए सैंपल तैयार करने, उनकी गुणवत्ता निर्धारित स्तर तक पहुंचाने और अन्य शुरुआती प्रक्रियाओं में कम से कम दो महीने लग सकते हैं। इसके बाद डीएनए डेटा तैयार करने में लगभग एक महीने का समय लगने की संभावना है। डेटा उपलब्ध होने के बाद बायोइन्फॉर्मेटिक्स विश्लेषण में करीब एक सप्ताह और लग सकता है।
इस तरह पूरी प्रक्रिया में लगभग तीन महीने या उससे अधिक समय लग सकता है। जांच के नतीजे सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि सूरीनाम से आए परिवार का गाजीपुर या पूर्वी उत्तर प्रदेश में रहने वाले लोगों से कोई जैविक रिश्ता है या नहीं।
132 साल बाद अपने पुरखों की जन्मभूमि तक पहुंचने की यह कोशिश परिवार के लिए भावनात्मक महत्व रखती है। अब सबकी निगाहें डीएनए जांच के नतीजों पर हैं, जिनसे रामनंदन के वंशजों को अपने भारतीय परिवार और पूर्वजों की जड़ों के बारे में नई जानकारी मिलने की उम्मीद है।