वृंदावन में साइबर ठगी का हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां एक कारोबारी को कथित तौर पर तीन दिन तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ रखकर जालसाजों ने उससे 30 लाख रुपये ठग लिए।
आरोपियों ने खुद को एटीएस का अधिकारी बताकर कारोबारी को उसकी पत्नी के मोबाइल नंबर से धोखाधड़ी और एक आपराधिक मामले में नंबर के इस्तेमाल होने की बात कहकर डराया। मामले की शिकायत मिलने के बाद साइबर क्राइम थाना पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस के मुताबिक, वृंदावन निवासी कारोबारी रतन लाल अग्रवाल को 28 सितंबर को एक अज्ञात व्यक्ति ने व्हाट्सऐप कॉल की। कॉल करने वाले ने खुद को आतंकवाद निरोधी दस्ते यानी एटीएस का अधिकारी बताया। आरोप है कि जालसाज ने कारोबारी से कहा कि उनकी पत्नी के मोबाइल नंबर का इस्तेमाल धोखाधड़ी के लिए किया जा रहा है और यह नंबर एक आपराधिक मामले से भी जुड़ा हुआ है।
आरोपियों ने कारोबारी को कार्रवाई का डर दिखाते हुए मामले को खत्म कराने के नाम पर 30 लाख रुपये की मांग की। शिकायत के अनुसार, जालसाजों ने कारोबारी को करीब तीन दिन तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखा। इस दौरान ऑडियो और वीडियो कॉल के जरिए उन पर लगातार नजर रखी गई और उन्हें किसी अन्य व्यक्ति से बातचीत नहीं करने के लिए कहा गया।
डर के कारण कारोबारी ने इस पूरी घटना की जानकारी अपने परिवार और दोस्तों तक को नहीं दी। शिकायत के मुताबिक, उन्होंने अपने अलग-अलग बैंक खातों से रकम का इंतजाम किया और 1 अक्टूबर को आरटीजीएस के जरिए जालसाजों द्वारा बताए गए बैंक खाते में 30 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए।
बताया गया कि कारोबारी के बेटे को जब इस घटना की जानकारी हुई तो उसे मामले में ठगी का संदेह हुआ। इसके बाद उसने तत्काल ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई और पुलिस को पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी।
वृंदावन के क्षेत्राधिकारी संदीप कुमार सिंह के मुताबिक, इस मामले में 3 अक्टूबर को शिकायत प्राप्त हुई थी। उसी दिन साइबर अपराध थाने में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया।
पुलिस के अनुसार, ठगी की रकम में से 15 लाख रुपये के एक अंतरण पर रोक लगाने में सफलता मिली है। पुलिस अब जालसाजों की पहचान और उनके नेटवर्क तक पहुंचने का प्रयास कर रही है। पुलिस अधिकारी ने बताया कि रोकी गई रकम को कारोबारी को वापस दिलाने की प्रक्रिया की जाएगी।