मादक पदार्थों और मनोरोगी पदार्थों की अंतर्राष्ट्रीय तस्करी पर अपनी लगातार कार्रवाई जारी रखते हुए, राजस्व आसूचना निदेशालय (डीआरआई) ने भारत से सऊदी अरब में बड़ी मात्रा में मेथंफेटामाइन के अवैध निर्यात के एक बड़े प्रयास को विफल कर दिया।

16-17 अगस्त 2026 के दौरान डीआरआई की ओर से खुफिया जानकारी के आधार पर चलाए गए एक अभियान में, नवा शेवा बंदरगाह पर निर्यात खेप से लगभग 56 किलोग्राम मेथंफेटामाइन पाउडर बरामद किया गया। इस खेप में मौजूद 351 बोरियों में से एक में इस प्रतिबंधित पदार्थ को चालाकी से मकई के साथ मिलाया गया था। बरामद मेथंफेटामाइन को स्वापक औषधि और मन प्रभावी पदार्थ (एनडीपीएस) अधिनियम, 1985 के प्रावधानों के अंतर्गत जब्त किया गया।

त्वरित जांच के चलते इस ऑपरेशन में शामिल निर्यातक और ट्रांसपोर्टर/ फ्रेट फॉरवर्डर की पहचान हो गई। जांच में पता चला कि ट्रांसपोर्टर/ फ्रेट फॉरवर्डर निर्यात खेप के परिवहन और सीमा शुल्क निकासी के लिए एक विदेशी खरीदार के साथ समन्वय कर रहा था। तस्करी के प्रयास में उनकी संबंधित भूमिकाओं के आधार पर, दोनों शख्स को एनडीपीएस अधिनियम, 1985 के प्रावधानों के अंतर्गत गिरफ्तार किया गया।
छिपाने का तरीका – बड़ी मात्रा में मेथंफेटामाइन को मकई के साथ इस तरह मिलाना कि उसे अलग न किया जा सके और खेप को एक सामान्य कृषि उत्पाद के रूप में छिपाना – निर्यात के दौरान नियमित जांच और पता लगाने से बचने के लिए अपनाई गई एक विशिष्ट कार्यप्रणाली का प्रतिनिधित्व करती है।

मेथंफेटामाइन एक अत्यंत शक्तिशाली कृत्रिम मनोउत्तेजक है, जिसके गलत इस्तेमाल और लत लगने की भारी संभावना होती है। इसका अवैध इस्तेमाल गंभीर शारीरिक और मनोवैज्ञानिक दुष्प्रभाव पैदा कर सकता है, जिनमें हृदय गति और रक्तचाप में बढ़ोतरी, बेचैनी, व्यामोह, मनोविकार और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं शामिल हैं; लंबे समय तक या बार-बार इस्तेमाल से दवा की लत लग सकती है और स्वास्थ्य एवं कार्यप्रणाली में महत्वपूर्ण हानि हो सकती है।










