संभल जिले में पुलिस ने बच्चों की तस्करी के आरोप में छह लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें दिल्ली के एक आईवीएफ क्लिनिक में काम करने वाली नर्स भी शामिल है।
पुलिस अधीक्षक (एसपी) कृष्ण कुमार विश्नोई ने बताया कि पुलिस ने इस गिरोह का पर्दाफाश कर दो बच्चों को बरामद किया, जिन्हें कथित तौर पर एक स्थानीय मेले से अगवा किया गया था।
पुलिस के अनुसार, पांच अगस्त को ओबरी गांव के एक मेले से चार साल का उर्वेश जबकि नौ अगस्त को उसी मेले से एक और बच्चा सुलेमान लापता हो गया था। पुलिस ने इलाके और मुरादाबाद की ओर जाने वाले रास्ते के सीसीटीवी फुटेज की जांच की और उस गाड़ी का पता लगाया जिसका इस्तेमाल बच्चों को कथित तौर पर दिल्ली ले जाने के लिए किया गया था।
एसपी ने बताया कि जब अपहरणकर्ताओं को पता चला कि पुलिस उनका पीछा कर रही है, तो उन्होंने एक बच्चे को ओबरी गांव में ही छोड़ दिया। उन्होंने बताया कि इसके बाद फरीद और फैसल नाम के दो कथित अपहरणकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया और उनसे पूछताछ के बाद पुलिस को इस बड़े नेटवर्क का पता चला।
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों की पहचान फरीद, फैसल, शमशाद, कोमल, वंदना जैन और गुड्डी के तौर पर हुई है जबकि तीन अन्य आरोपी सलमान, सुल्तान और शाज़िया फरार हैं।
दिल्ली में कथित तौर पर एक आईवीएफ क्लिनिक में नर्स के तौर पर काम करने वाली कोमल कथित तौर पर हाई-प्रोफाइल सोसायटियों में ऐसे दंपत्ति की पहचान करती थी, जो संतान चाहते थे।
पुलिस ने बताया कि गिरोह कथित तौर पर नकली माता-पिता का इंतजाम करता था और बिना किसी दस्तावेज़ के अगवा किए गए बच्चों को लगभग पांच लाख रुपये प्रति बच्चा बेचता था।
पुलिस ने बताया कि गुड्डी ने कथित तौर पर बच्चा खरीदने के लिए अपहरणकर्ताओं को 2.5 लाख रुपये दिए थे, जबकि शमशाद कथित तौर पर उस कार का ड्राइवर था जिसका इस्तेमाल बच्चों को ले जाने के लिए किया गया था।
आरोपी कथित तौर पर मेलों और अन्य भीड़-भाड़ वाली जगहों पर बच्चों को निशाना बनाते थे और मांग के अनुसार अपहरण की घटनाओं को अंजाम देते थे। गिरफ्तार किए गए छह आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
पुलिस ने कहा कि वे उनकी पुलिस हिरासत की मांग करेंगे ताकि यह पता लगाया जा सके कि गिरोह ने अतीत में ऐसी कितनी घटनाओं को अंजाम दिया है। पुलिस ने बताया कि दोनों लापता बच्चों को बरामद कर लिया गया है और अभियान में शामिल टीम को इनाम दिया गया है।









