लखनऊ, प्रदेश सरकार ने नगरीय निकायों के लिए संपत्ति कर के लंबित बकायों की वसूली को लेकर एकमुश्त समाधान योजना (ओटीएस) लागू करने का निर्णय लिया है। योजना का लाभ प्रदेश के सभी 762 नगरीय निकायों में लंबित गृहकर, जलकर और सीवरकर के बकायेदारों को मिलेगा।
सरकार के इस फैसले से लंबे समय से संपत्ति कर के बकाये में फंसे लाखों करदाताओं को राहत मिलने की उम्मीद है। साथ ही, पुराने कर बकायों की वसूली से नगरीय निकायों की वित्तीय स्थिति मजबूत होगी और विकास कार्यों के लिए उनके पास अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध होंगे।
ओटीएस योजना की अवधि चार माह निर्धारित की गई है। इसका क्रियान्वयन 15 अगस्त 2026 से 15 दिसंबर 2026 तक किया जाएगा। योजना के शुरुआती चरण में 15 अगस्त से 14 सितंबर 2026 तक नगरीय निकायों द्वारा पात्र करदाताओं और संबंधित हितधारकों को योजना की जानकारी देने के साथ व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा।
इस योजना के दायरे में प्रदेश के 17 नगर निगम, 200 नगर पालिका परिषद और 545 नगर पंचायतें आएंगी।
करदाताओं की सुविधा के लिए सरकार ने बकाया संपत्ति कर के भुगतान के लिए अधिकतम तीन किस्तों की व्यवस्था की है। योजना लागू होने के 30 दिन के भीतर करदाता को कुल बकाये की एक-तिहाई राशि जमा करनी होगी। शेष दो-तिहाई राशि अगले दो महीनों में दो मासिक किस्तों के माध्यम से जमा की जा सकेगी।
इस तरह योजना के तहत देय पूरी धनराशि का भुगतान अधिकतम तीन माह में पूरा करना अनिवार्य होगा।
नगर विकास मंत्री अरविंद कुमार शर्मा ने कहा कि प्रदेश सरकार नगरीय निकायों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के साथ नागरिकों को बेहतर नगरीय सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार काम कर रही है।
ओटीएस योजना से लंबे समय से लंबित कर बकायों का सरल तरीके से निस्तारण होगा और करदाताओं को पुराने बकाये के भुगतान का अवसर मिलेगा।
उन्होंने कहा कि योजना के माध्यम से नगरीय निकायों को लंबित राजस्व की प्रभावी और समयबद्ध वसूली में मदद मिलेगी। इससे प्राप्त राजस्व का इस्तेमाल सड़क, जल निकासी, पेयजल, स्वच्छता, प्रकाश व्यवस्था और अन्य आवश्यक जनसुविधाओं को बेहतर










