नई दिल्ली, उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को दोहराया कि सेवारत शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) उत्तीर्ण करना अनिवार्य है। इसी के साथ न्यायालय ने सेवा में बने रहने के लिए परीक्षा उत्तीर्ण करने की समय सीमा 31 अगस्त, 2028 तक बढ़ा दी है।
न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति मनमोहन की पीठ ने अंजुमन इशात-ए-तालीम ट्रस्ट मामले में अदालत के पहले के फैसले को चुनौती देने वाली कई राज्य सरकारों, शिक्षक संघों और व्यक्तिगत शिक्षकों द्वारा दायर 65 से अधिक पुनर्विचार याचिकाओं को खारिज कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षकों के लिए अनिवार्य टीईटी ( Teacher Eligibility Test ) पास करने की डेडलाइन एक साल के लिए बढ़ा दी है। अब यह पात्रता हासिल करने के लिए शिक्षकों को 31 अगस्त, 2028 तक का मौका दिया गया है। लेकिन, सुप्रीम कोर्ट ने मौजूदा टीचरों को इस परीक्षा से छूट देने से साफ इनकार कर दिया है और कहा है कि उन्हें यह पास करना ही होगा।
न्यायालय ने शिक्षा के अधिकार (RTE) अधिनियम के प्रावधानों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए शिक्षकों का न्यूनतम योग्यता मानक पूरा करना आवश्यक है। अदालत ने कहा कि चाहे शिक्षक पहले से सेवा में क्यों न हों, उन्हें कानून के तहत तय की गई इस पात्रता परीक्षा को उत्तीर्ण करना ही होगा। इसमें किसी भी स्तर पर छूट नहीं दी जा सकती।
राहत के साथ मिला अंतिम मौका शीर्ष अदालत ने उन सेवारत शिक्षकों की समस्याओं पर भी विचार किया जो किसी कारणवश अब तक टीईटी (TET) परीक्षा पास नहीं कर पाए हैं। कोर्ट ने उनकी सेवाओं को ध्यान में रखते हुए मानवीय आधार पर अंतिम तिथि (Deadline) को बढ़ा दिया है। अदालत ने सख्त लहजे में यह भी कहा कि बढ़ी हुई इस अंतिम तिथि के बाद योग्यता पूरी न करने वाले शिक्षकों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
इस फैसले के बाद अब सभी संबंधित राज्यों के शिक्षा विभागों और स्कूल प्रशासनों को निर्देश जारी किए जा रहे हैं कि वे तय समय-सीमा के भीतर अपने यहाँ कार्यरत सभी सेवारत शिक्षकों का टीईटी प्रमाण पत्र सुनिश्चित करें। इस निर्णय से देश भर के हजारों उन शिक्षकों को एक और अवसर मिल गया है जो अपनी नौकरी सुरक्षित रखने के लिए इस परीक्षा को पास करने का प्रयास कर रहे हैं।










