पीलीभीत से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) कार्यालय में तैनात एक चपरासी ने सरकारी खजाने को करोड़ों का चूना लगा दिया।
आरोपी चपरासी इल्हाम शम्सी उर्फ रहमान ने अपनी तीन पत्नियों, साली, सास, सलहज और महिला मित्रों के खातों का इस्तेमाल कर 8 करोड़ 15 लाख रुपये का गबन किया। इस मामले में पुलिस ने जाल बिछाते हुए हाल ही में 7 महिलाओं को गिरफ्तार किया है, जो इस ‘करोड़ों के खेल’ में सीधे तौर पर शामिल थीं।
इस घोटाले की जड़ें साल 2018 से जुड़ी हैं। आरोपी ने डीआईओएस कार्यालय में रहते हुए सिस्टम की खामियों का भरपूर फायदा उठाया। उसने फर्जी बेनिफिशियरी आईडी (Beneficiary ID) और ट्रेजरी टोकन जनरेशन का सहारा लेकर शिक्षकों के वेतन मद से सरकारी धनराशि निकाली और उसे अपने करीबियों के खातों में ट्रांसफर कर दिया।
पुलिस की जांच में अब तक 53 संदिग्ध खाते मिले हैं, और सरकारी खजाने को हुए नुकसान की भरपाई के लिए 5 करोड़ 50 लाख रुपये की राशि फ्रीज करा दी गई है।
पुलिस की जांच में यह खुलासा हुआ कि आरोपी ने यह कमाई सिर्फ ऐशो-आराम के लिए नहीं, बल्कि बड़ी प्रॉपर्टी और जमीन खरीदने में निवेश की थी। गिरफ्तार महिलाओं में उसकी दो पत्नियां लुबना और अजरा खान के अलावा साली फातिमा, सलहज आफिया, सास नाहिद और दो महिला मित्र परवीन और आशकारा परवीन शामिल हैं।
हालांकि मुख्य आरोपी खुद को बचाने की कोशिश में लगा है, लेकिन उसके पूरे परिवार और करीबियों का नेटवर्क अब पुलिस की गिरफ्त में है।
फिलहाल इस मामले ने विभाग के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। 7 सालों तक एक चपरासी करोड़ों का खेल खेलता रहा और किसी को भनक तक नहीं लगी, यह गंभीर प्रशासनिक लापरवाही की ओर इशारा करता है। नए एसपी सुकीर्ति माधव की तैनाती के बाद इस मामले की जांच में तेजी आई है।




