प्रयागराज, इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने बिना कारण बताए व्यापारियों का जीएसटी पंजीकरण रद्द करने पर अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई है।
‘मेसर्स अनिल आर्ट एंड क्राफ्ट’ द्वारा दायर रिट याचिका स्वीकार करते हुए न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह और न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ला की खंडपीठ ने भदोही के सहायक आयुक्त (राज्य कर) द्वारा 15 अक्टूबर 2025 को पारित आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें आठ अक्टूबर 2025 से याचिकाकर्ता का जीएसटी पंजीकरण निरस्त कर दिया गया था।
अदालत ने निर्देश दिया कि इस आदेश और निर्णय की प्रति वाणिज्यिक कर आयुक्त को भेजी जाए और आयुक्त 15 दिन के भीतर उन सभी जीएसटी अधिकारियों को उचित प्रशासनिक निर्देश जारी करें जो पंजीकरण रद्द करने संबंधी मामलों को देखते हैं।
इसने कहा, “इन निर्देशों में स्पष्ट रूप से उन अधिकारियों के खिलाफ दंडात्मक प्रावधान शामिल होने चाहिए, जो बिना कारण आदेश पारित करते हैं या व्यापारी को अपना पक्ष रखने का अवसर नहीं देते।
अदालत ने कहा कि अधिकारियों की ऐसी कार्रवाई ‘‘आर्थिक मृत्यु’’ के समान है, क्योंकि इस तरह के आकस्मिक निरस्तीकरण आदेशों से व्यापारी कठिनाई में पड़ते हैं और उनकी वैध व्यावसायिक गतिविधियां बाधित होती हैं।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि बिना कारण बताए या पर्याप्त अवसर दिए बिना किसी डीलर को इस संवैधानिक जीवन रेखा (जीएसटी पंजीकरण) से वंचित करना जीएसटी कानून की भावना के विपरीत है।



