अयोध्या राम पथ स्थित त्रिवेणी सदन में आज अचानक भीषण आग लग गई, जिससे पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया। आग लगते ही धुआं फैल गया, लेकिन दमकल विभाग की तत्परता और प्रशासन की त्वरित कार्रवाई से स्थिति पर नियंत्रण पा लिया गया। कोई जनहानि नहीं हुई।
त्रिवेणी सदन जैसी महत्वपूर्ण इमारत में अग्निशमन यंत्र, पानी की पाइपलाइन और छिड़काव यंत्र लगे होने का दावा किया गया था, लेकिन जब आग लगी, तो ये सभी उपकरण बेकार साबित हुए। पानी की आपूर्ति बाधित थी, जिससे आग बुझाने में कठिनाई हुई।
मुख्य अग्निशमन अधिकारी महेंद्र प्रताप सिंह के नेतृत्व में दमकल विभाग की टीम मौके पर पहुंची। डॉरमेट्री क्षेत्र पूरी तरह से बंद था, जिससे आग बुझाने में दिक्कतें आईं। अंततः टीम को दरवाजा तोड़कर अंदर घुसना पड़ा और कुछ ही देर में आग पर काबू पा लिया गया।
विकास प्राधिकरण के सचिव सतेंद्र सिंह ने कहा कि त्रिवेणी सदन को सभी भवन निर्माण नियमों और सुरक्षा मानकों के तहत बनाया गया था और अग्निशमन विभाग सहित सभी संबंधित विभागों से अनापत्ति प्रमाण पत्र लिया गया था।
मुंबई की सुखसागर कंपनी को इस भवन का संचालन सौंपा गया था। अब सवाल उठता है कि यदि सभी मानकों का पालन किया गया था, तो सुरक्षा उपकरण काम क्यों नहीं कर रहे थे?
त्रिवेणी सदन की आग ने फिर दिखा दिया कि भवन निर्माण से लेकर देखरेख तक की प्रक्रियाओं में गंभीर लापरवाही है। विकास प्राधिकरण ने जांच के आदेश दिए हैं और कहा है कि अगर सुखसागर कंपनी की लापरवाही पाई गई, तो कार्रवाई होगी।


