अयोध्या, सीता स्वयंवर में गुरु विश्वामित्र के साथ गए श्री राम ने गुरु के आदेश के बाद भगवान शिव शंकर के धनुष को तोड़ दिया। गुरु शिष्य परंपरा का पालन करने वाले राम का हर काम अपने अपने आप में अनूठा और आदर्श परंपरा का उदाहरण है।
सीता स्वयंवर में पहुंचे राम ने राजा जनक के विलाप के बाद भी शिव के धनुष को तोड़ने के बारे में किंचित मात्र भी नहीं सोचा लेकिन गुरु विश्वामित्र के धनुष तोड़ने के आदेश के बाद राम ने धनुष को तोड़ दिया। शहर के मां काली मंदिर काशीपुर रुदौली में चल रही श्री राम कथा के छठे दिन मां कामाख्या धाम के आचार्य कथा व्यास मनोज मिश्रा ने कही।
उन्होंने कहा कि सीता स्वयंवर मे सभी राजा, राजकुमार धनुष तोड़ने के लिए अपने बल का जहां बखान कर रहे थे वहीं श्री राम अपने अनुज लक्ष्मण के साथ गुरु के सानिध्य में बैठकर सीता स्वयंवर को देख रहे थे।इसके पहले जनकपुर भ्रमण के दौरान शहर में दोनों भाइयों के आगमन को लेकर उल्लास का वातावरण रहा।
रावण और बाणासुर जैसे महारथी धनुष तोड़े बिना चले गए। धनुष न टूट पाने से विचलित राजा जनक के विलाप से भी राम धनुष तोड़ने नही उठे।गुरु के आदेश का पालन करने उठे श्री राम को देख सभा मंडप में आए राजा और राजकुमार उपहास करने लगे। देखते देखते श्री राम ने भगवान शिव के धनुष तोड़ दिया।
इसके साथ उल्लासित अयोध्या में धनुष तो टूटने की जानकारी मिलने के बाद आए परशुराम ने श्रीराम से वार्तालाप की।श्री राम का परिचय मिलने के बाद चले गए। सीता स्वयंवर के प्रसंग के दौरान विधायक रामचंद्र यादव ने पुष्प वर्षा की। श्री राम कथा विधायक ने कथा व्यास को पकड़ी पहनकर सम्मानित किया।
कथा में पूर्व पालिका अध्यक्ष अशोक कसोधन, मां काली मंदिर सेवा ट्रस्ट के ओमप्रकाश मिश्रा, वीरेंद्र मिश्रा, शिवनारायण लोधी, संदीप सोनकर, हनुमान मिश्रा, सभासद उमाशंकर कसौधन, दुर्गेश श्रीवास्तव,अनिल मिश्र, राज किशोर सिंह, विश्वनाथ तिवारी,आशीष वैश्य, श्याम सुंदर डालमिया, हिमांशु गर्ग, बुधराम राजपूत, सर्वेश मिश्रा,पंकज शर्मा, नीरज द्विवेदी, आशीष शर्मा, दरवेश मिश्रा, सुधीर तिवारी, लालता प्रसाद गौतम व जितेंद्र मिश्रा आदि मौजूद रहे।


