नई दिल्ली, देश में लोकसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है। देश के सभी राजनीतिक दलों के नेता अब चुनावी मैदान पर है और अपने-अपने प्रत्याशियों के लिए प्रचार कर रहे हैं। इसी बीच पीएम मोदी ने एएनआई को एक इंटरव्यू दिया है। इंटरव्यू के दौरान उन्होंने विभिन्न मुद्दों पर खुलकर बात की। इसके साथ ही उन्होंने कांग्रेस पार्टियों पर जमकर निशाना साधा। इसके साथ ही कांग्रेस के लगाए हुए आरोपों का जवाब दिया।
बता दें कि साक्षात्कार में कांग्रेस के आरोप पर कि ‘400 पार से संविधान रद्द हो जाएगा’ पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जो व्यक्ति UN में जाकर दुनिया की सबसे पुरानी भाषा तमिल भाषा का गुणगान करता है। किस आधार पर उस व्यक्ति पर आप ऐसे आरोप कैसे लगा सकते हैं? समस्या उनमें (विपक्ष) है वे देश को एक ही सांचे में ढालना चाहते हैं। हम विविधता की पूजा करते हैं। हम इसका जश्न मनाते हैं। वहीं पीएम ने आगे कहा कि मातृ भाषा बनने में क्या दिक्कत है। मैं तो विविधता को लाने की कोशिश कर रहा हूं।
इस साक्षात्कार के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि मेरे पास बड़ी योजनाएं हैं। किसी को डरने की जरूरत नहीं है। मेरे फैसले किसी को डराने या किसी को कमतर करने के लिए नहीं होते हैं। वे देश के समग्र विकास के लिए बनाए जाते हैं।
पीएम मोदी ने कहा ‘दुर्भाग्य से, आजकल हम देखते हैं कि एक शब्द के प्रति कोई प्रतिबद्धता और जिम्मेदारी नहीं है। आपने किसी नेता के पुराने वीडियो वायरल होते हुए देखे होंगे, जहां उनके हर विचार विरोधाभासी होते हैं। जब लोग यह देखते हैं तो उन्हें लगता है कि यह नेता जनता की आंखों में धूल झोंकने की कोशिश कर रहा है। हाल ही में, मैंने एक राजनेता को यह कहते हुए सुना, ‘एक झटके में गरीबी हटा दूंगा।’ जिनको 5-6 दशक तक सत्ता में रहने का मौका मिला, वो जब ऐसा कहते हैं तो देश सोचता है कि ये आदमी क्या कह रहा है?’
My interview to @ANI. https://t.co/35jNOT6zYl
— Narendra Modi (@narendramodi) April 15, 2024
वहीं इलेक्टोरल बॉन्ड पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि लंबे समय से हमारे देश में चर्चा चली है कि चुनावों में काला धन एक बहुत बड़ा खतरनाक खेल हो रहा है। चुनाव में खर्च होता ही होता है। सभी पार्टियां करती हैं, इससे कोई इंकार नहीं कर सकता। मैं चाहता था कि हम एक कोशिश करें कि काले धन से चुनाव को मुक्ति कैसे मिले। एक छोटा सा रास्ता मिला जिसे संसद में सब ने सराहा था।
यदि इलेक्टोरल बॉन्ड नहीं होते तो किस व्यवस्था में ताकत है कि वो ढूंढ के निकालते कि पैसा कहां से आया और कहां गया? ये इलेक्टोरल बॉन्ड्स की सफलता की कहानी है कि इलेक्टोरल बॉन्ड्स थे। मेरी चिंता ये है कि मैं कभी नहीं कहता कि निर्णय लेने में कोई कमी नहीं है। निर्णय लेने में, हम सीखते हैं और सुधार करते हैं। इसमें भी सुधार के लिए बहुत संभवना है। लेकिन आज हमने देश को पूरी तरह से कालेधन की ओर धकेल दिया है इसीलिए मैं कहता हूं कि हर किसी को इसका पछतावा होगा।








