पटना, जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के अध्यक्ष नीतीश कुमार ने रिकॉर्ड नौवीं बार बिहार के मुख्यमंत्री के तौर पर रविवार को शपथ ली। यहां राजभवन में राज्यपाल राजेंद्र आर्लेकर ने उन्हें पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलायी।
कुमार के साथ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं विजय कुमार सिन्हा, सम्राट चौधरी एवं प्रेम कुमार और जद (यू) के विजेंद्र यादव एवं श्रवण कुमार ने भी मंत्रिपद की शपथ ली।
इसके अलावा एचएएम के संतोष कुमार सुमन, सुमित कुमार सिंह (निर्दलीय) ने नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली नयी सरकार में मंत्रिपद की शपथ ली।
कुमार ने दिन में यह कहते हुए मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था कि बिहार में सत्तारूढ़ महागठबंधन और विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन में उनके लिए ‘चीजें ठीक नहीं चल रही हैं।’
इसी के साथ उन्होंने भाजपा के सहयोग से नयी सरकार बनाने का दावा पेश किया था। लगभग डेढ़ साल पहले उन्होंने भाजपा से नाता तोड़ लिया था।
बता दें कि नीतीश और बीजेपी की ये दोस्ती 2024 के लोकसभा चुनावों कोध्यान में रखते हुए फिर से पटरी पर लौट आई है। माना जा रहा है कि नए सत्ता समीकरण से राज्य में नया सियासी समीकरण बनने जा रहा है। नीतीश कुमार संग 17 महीने बाद दोबारा गठबंधन की डील कर बीजेपी ने एकसाथ कई निशाने साधे हैं।
कल तक जहां बिहार में उसकी स्थिति बहुत मजबूत होने के दावे नहीं किए जा रहे थे, वह अब रातों-रात बदल गए हैं। जानकारी के मुताबिक अब नए गठबंधन की वजह से यह दावा किया जा रहा है कि लोकसभा चुनाव में एनडीए गठबंधन बिहार की सभी 40 सीटों पर जीत दर्ज करेगा। 2019 के लोकसभा चुनावों में इस गठबंधन ने 39 सीटों पर जीत दर्ज की थी। 17 सीटों पर बीजेपी, 16 पर जेडीयू और 6 सीटों पर लोजपा ने जीत दर्ज की थी।
नए हालात में पुरानी दोस्ती के पटरी पर लौटने से नीतीश का लव-कुश का पुराना सामाजिक फॉर्मूला अब मजबूत होता नजर आ रहा है। नीतीश के महागठबंधन का हिस्सा बनने के बाद से बीजेपी इस फॉर्मूले को साकार करना चाहती थी। इसीलिए उपेंद्र कुशवाहा से लेकर आरसीपी सिंह तक को बीजेपी ने अपने साथ कर लिया था और सम्राट चौधरी को प्रदेश अध्यक्ष बनाया था। ये अलग बात है कि नीतीश को सीएम पद से हटाने की कसम खाने और पगड़ी बांधने वाले सम्राट अब उन्हीं की सरकार में नंबर दो बनने जा रहे हैं।
बीजेपी ने सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा को उप मुख्यमंत्री बनाकर अगड़ा-पिछड़ा समीकरण का साफ संकेत दिया है। बीजेपी कोटे से तीसरे मंत्री प्रेम कुमार होंगे जो ईबीसी समुदाय से आते हैं। कोइरी-कुर्मी के अलावा पिछड़े समुदाय की अन्य गैर यादव जातियां भी एनडीए के साथ आ सकती हैं। इनमें बनिया, सोनार, भाट, घटवार समेत कई जातियां शामिल हैं। अगड़ी जातियों में भूमिहार 2.86 फीसदी, ब्राह्मण 3.65 फीसदी, राजपूत 3.45 फीसदी की आबादी है।


