भदोही, जिले में एक गर्भवती महिला को जिला अस्पताल में भर्ती करने से कथित तौर पर इनकार करने और सड़क किनारे प्रसव कराने के मामले में चार चिकित्सकों और एक स्टाफ नर्स को गंभीर लापरवाही का दोषी पाया गया है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी संतोष कुमार चक ने बताया कि जिलाधिकारी शैलेश कुमार के निर्देश पर गठित तीन सदस्यीय जांच दल ने बृहस्पतिवार को अपनी रिपोर्ट सौंप दी।
उन्होंने बताया कि 20 वर्षीय रानी वनवासी को सोमवार को महाराजा चेत सिंह सरकारी जिला अस्पताल में एनीमिया के आधार पर कथित तौर पर भर्ती करने से मना कर दिया गया था। रानी के भाई ने रक्तदान करने की तैयारी जताई थी, लेकिन अस्पताल की ओर से कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई। इसके बाद रानी ने मंगलवार रात अपने साथ आई महिलाओं की मदद से सड़क किनारे बच्चे को जन्म दिया।
आज सुबह यह खबर पढ़ी तो एक सवाल दिल में अटक गया—एक मां को अपने बच्चे को जन्म देने के लिए अस्पताल के अंदर जगह क्यों नहीं मिली?
भदोही के ज्ञानपुर जिला अस्पताल के बाहर एक गर्भवती महिला ने सड़क किनारे बच्चे को जन्म दिया। महिला ने आरोप लगाया कि उसे भर्ती नहीं किया गया और जाति व बदबू… pic.twitter.com/RpHJctsYnE
— Amardeep Kushwaha (@AmardeepKushw20) October 1, 2026
मामले में आरोप था कि चिकित्सकों और स्टाफ नर्स ने रानी के मुसहर समुदाय से होने की जानकारी मिलने के बाद उसे छूने से इनकार कर दिया और अस्पताल में भर्ती नहीं किया। मामले की जांच के लिए गठित टीम में उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी राम आशीष सरोज और ओम प्रकाश शुक्ला तथा स्त्री रोग विशेषज्ञ शालिनी पाठक शामिल थीं।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि जांच के बाद अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अजय कुमार तिवारी और सोमवार को ड्यूटी पर मौजूद स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. नीलिमा धवन के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की गई है। डॉ. मुकेश प्रजापति का एक महीने का वेतन रोक दिया गया है, जबकि मंगलवार रात ड्यूटी पर मौजूद संविदा चिकित्सक डॉ. पंकज कुमार को सेवा से हटा दिया गया है। स्टाफ नर्स नीलम मौर्या का तबादला औराई स्वास्थ्य केंद्र कर दिया गया है।
जांच दल को अस्पताल का प्रसूति कक्ष भी बंद मिला। दल ने कहा कि मुख्य चिकित्सा अधीक्षक और अन्य संबंधित लोगों ने अस्पताल आने के बजाय फोन पर ही मामले को निपटाने का प्रयास किया। मामले में जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।