गोरखपुर, प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को गोरखनाथ मंदिर में महंत दिग्विजयनाथ की 57वीं और महंत अवेद्यनाथ की 12वीं पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा को संबोधित किया।
उन्होंने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण और धार्मिक स्थलों के विकास का उल्लेख करते हुए कहा कि अयोध्या का बदलता स्वरूप कुछ लोगों को असहज कर रहा है। उन्होंने सनातन धर्म के अनुयायियों से भ्रम और गलत सूचनाएं फैलाने वाली कोशिशों से सावधान रहने की अपील की।
मुख्यमंत्री ने रामायण के पात्र कालनेमि का उदाहरण देते हुए कहा कि समाज को भ्रमित करने वाली ताकतों को पहचानने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म की एकता और सामाजिक समरसता के लिए किसी प्रकार का भ्रम या संशय नहीं होना चाहिए। योगी ने अयोध्या के कायाकल्प के साथ काशी विश्वनाथ धाम और विंध्याचल धाम के विकास का भी उल्लेख किया।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत की 140 करोड़ से अधिक आबादी के बीच एकता और साझा उद्देश्य जरूरी है। उनके अनुसार अलग-अलग दिशाओं और आवाजों में बंटने से समाज की शक्ति कमजोर हो सकती है, जबकि सामूहिक प्रयास से देश की प्रगति को गति मिल सकती है। उन्होंने ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना का उल्लेख करते हुए सभी वर्गों के साथ मिलकर आगे बढ़ने की बात कही।
श्रद्धांजलि सभा में मुख्यमंत्री ने महंत दिग्विजयनाथ के शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र में योगदान को याद किया। उन्होंने महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की स्थापना और शिक्षा के प्रसार में उसके योगदान का उल्लेख किया। गोरखनाथ मंदिर में दिग्विजयनाथ की 57वीं और अवेद्यनाथ की 12वीं पुण्यतिथि के अवसर पर 24 से 30 सितंबर तक सात दिवसीय श्रद्धांजलि समारोह आयोजित किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने गोरक्षपीठ को व्यापक सनातन परंपरा के प्रति समर्पित संस्था बताते हुए कहा कि अलग-अलग पंथों और संप्रदायों की उपासना पद्धतियां अलग हो सकती हैं, लेकिन सभी आध्यात्मिक परंपराओं के प्रति सम्मान की भावना बनी रहनी चाहिए। कार्यक्रम में संतों और धर्माचार्यों की भी सहभागिता रही।