लखनऊ, प्रदेश सरकार की कैबिनेट ने शनिवार को **कैबिनेट बाई सर्कुलेशन** के माध्यम से कई महत्वपूर्ण और जनहित से जुड़े प्रस्तावों को मंजूरी दे दी।
सरकार के इन फैसलों से महिला कर्मचारियों, परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत रसोइयों, आम यात्रियों और अयोध्या आने वाले श्रद्धालुओं को सीधी राहत मिलने की उम्मीद है।
कैबिनेट का सबसे महत्वपूर्ण फैसला सरकारी महिला कर्मचारियों के **मातृत्व अवकाश** से जुड़ा है। अब दूसरे बच्चे के लिए मातृत्व अवकाश प्राप्त करने के लिए दोनों बच्चों के जन्म के बीच दो वर्ष का अंतर होना अनिवार्य नहीं रहेगा। पहले लागू व्यवस्था में दो बच्चों के बीच कम से कम दो साल का अंतर जरूरी होने के कारण कई महिला कर्मचारी इस सुविधा से वंचित हो जाती थीं। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ के हालिया फैसले के बाद राज्य सरकार ने इस बाध्यता को समाप्त करने का निर्णय लिया है।
इसके अलावा, प्रदेश के परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में बच्चों के लिए मिड-डे-मील तैयार करने वाले करीब 3.50 लाख रसोइयों को भी बड़ी राहत दी गई है। सरकार ने उनके मानदेय में 1,000 रुपये प्रतिमाह की वृद्धि को मंजूरी दे दी है।
इसके बाद रसोइयों का मासिक मानदेय 2,000 रुपये से बढ़कर 3,000 रुपये हो जाएगा। बढ़ा हुआ मानदेय सितंबर से लागू किए जाने की बात कही गई है। साथ ही रसोइयों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा से जोड़ने की योजना पर भी निर्णय लिया गया है।
परिवहन सुविधाओं के विस्तार के लिए बरेली के नवाबगंज और बुलंदशहर के जहांगीराबाद में नए बस स्टेशनों के निर्माण का रास्ता भी साफ हो गया है। कैबिनेट ने इसके लिए राजस्व विभाग की भूमि को परिवहन विभाग को निशुल्क हस्तांतरित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। नए बस स्टेशनों के निर्माण से स्थानीय यात्रियों को बेहतर परिवहन सुविधाएं मिलने की उम्मीद है।
वहीं, धार्मिक नगरी अयोध्या में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में भी बड़ा फैसला लिया गया है। अयोध्या धाम के पंचकोसी परिक्रमा मार्ग के 9.025 किलोमीटर लंबे हिस्से को चार लेन करने के लिए 466.45 करोड़ रुपये की पुनरीक्षित लागत को प्रशासनिक और वित्तीय मंजूरी दे दी गई है।
श्रीराम मंदिर के निर्माण के बाद अयोध्या में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। पंचकोसी परिक्रमा के दौरान भारी भीड़ और यातायात दबाव को देखते हुए मार्ग को चौड़ा करने का निर्णय लिया गया है। इससे श्रद्धालुओं की आवाजाही सुगम होने के साथ ही यातायात व्यवस्था बेहतर बनाने और दुर्घटनाओं की आशंका कम करने में भी मदद मिलेगी।









