विशेष रिपोर्ट, उत्तर प्रदेश में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) की हालिया कार्रवाई ने खाद्य तेल उद्योग में हड़कंप मचा दिया है। यह कार्रवाई केवल सोशल मीडिया का कोई वायरल मैसेज नहीं है, बल्कि 206 नमूनों की गहन लैब जांच के बाद लिया गया एक बड़ा प्रशासनिक निर्णय है।
FSDA ने इन 14 कंपनियों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 (FSS Act) के तहत सख्त रुख अपनाया है:
धारा 59 (असुरक्षित भोजन के लिए दंड): लैब रिपोर्ट में ‘सीसा’ (Lead) की अधिक मात्रा पाए जाने के कारण इन कंपनियों पर यह धारा लगाई गई है। इसमें दोष सिद्ध होने पर 6 महीने से लेकर आजीवन कारावास और 10 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है।
धारा 52 और 53 (भ्रामक विज्ञापन): जिन कंपनियों ने ‘फोर्टिफाइड’ (विटामिन युक्त) होने का झूठा दावा किया, उन पर भ्रामक लेबलिंग के लिए भारी जुर्माना लगाया जा रहा है।
लाइसेंस रद्दीकरण: आयुक्त डॉ. रोशन जैकब के आदेश पर इन सभी इकाइयों के निर्माण लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिए गए हैं।
इन ब्रांड्स से रहें सावधान
जांच में दोषी पाई गई कंपनियों के नाम और शहर नीचे दिए गए हैं। प्रशासन ने इन्हें बाजार से तुरंत हटाने (Recall) के निर्देश दिए हैं:
लखनऊ: हिंद वेज ऑयल, संकट मोचन एंटरप्राइजेज।
कानपुर: भीम श्री प्रोडक्ट्स, एनआर उद्योग, कटारिया एडिबल्स।
कानपुर देहात: वैभव एडिबल्स, मंटोरा ऑयल प्रोडक्शन।
मेरठ: जीएस एग्रो फूड्स, जेपी एग्रो ऑयल, राजेंद्र कुमार सुशील चंद।
अन्य: आगरा ऑयल जनरल इंडस्ट्री (हाथरस), एनएम ऑयल कॉर्पोरेशन (आगरा), केएल वेजिटेबल ऑयल (हापुड़), जय लक्ष्मी सॉल्वेंट्स (गोरखपुर)।
सेहत पर ‘लेड’ और ‘मिलावट’ का वार
विशेषज्ञों के अनुसार, तेल में निर्धारित मानक से अधिक सीसा (Lead) धीमे ज़हर की तरह काम करता है। यह किडनी, लिवर और नर्वस सिस्टम को स्थायी नुकसान पहुँचा सकता है। वहीं, विटामिन A और D की कमी वाले ‘नकली फोर्टिफाइड’ तेल उपभोक्ताओं के साथ सीधे तौर पर धोखाधड़ी है।
क्या करें उपभोक्ता?
अपनी रसोई में चेक करें कि कहीं इनमें से किसी कंपनी का तेल तो इस्तेमाल नहीं हो रहा।
यदि कोई दुकानदार प्रतिबंधित स्टॉक बेच रहा है, तो स्थानीय खाद्य सुरक्षा अधिकारी को सूचित करें।
हमेशा विश्वसनीय और लैब-टेस्टेड ब्रांड्स का ही चुनाव करें।




