रायपुर, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं के मामले में भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के सेवानिवृत्त अधिकारी समेत पांच लोगों को गिरफ्तार किया। अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग भर्ती घोटाले की जांच में बड़ा कदम उठाते हुए सीबीआई ने बृहस्पतिवार को पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया और इनमें आयोग के वरिष्ठ अधिकारी और उनके नजदीकी रिश्तेदार शामिल हैं।
ये गिरफ्तारियां 2020 और 2021 की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और भाई-भतीजावाद के आरोपों से जुड़े मामले में हुई है।
अधिकारियों ने बताया कि गिरफ्तार किए गए आरोपियों में जीवन किशोर ध्रुव, (तत्कालीन सचिव, आयोग), आरती वासनिक (तत्कालीन नियंत्रक परीक्षा), सुमित ध्रुव (डिप्टी कलेक्टर, तत्कालीन सचिव का पुत्र), मिषा कोसले (डिप्टी कलेक्टर, तत्कालीन अध्यक्ष के भाई की बहू और दीपा आदिल (जिला आबकारी अधिकारी, तत्कालीन अध्यक्ष के भाई की बहू) शामिल हैं।
सीबीआई के अनुसार, यह कार्रवाई चयन प्रक्रिया में हेराफेरी और पक्षपात से जुड़ी बड़ी साजिश की परतें खोलने के प्रयास का हिस्सा है। सीबीआई ने नौ जुलाई 2024 को यह मामला दर्ज किया था।
प्राथमिकी में आरोप लगाया गया कि तत्कालीन अध्यक्ष, सचिव और अन्य अधिकारी, 2020 से 2022 के बीच आयोजित परीक्षाओं और साक्षात्कारों में अपने पुत्र, पुत्री और रिश्तेदारों का चयन करवाने में शामिल थे।
अधिकारियों ने बताया कि 2021 भर्ती प्रक्रिया में 1,29,206 उम्मीदवारों ने प्रारंभिक परीक्षा दी, जिनमें से 2,548 मुख्य परीक्षा के लिए चुने गए और इनमें 509 अभ्यर्थियों ने साक्षात्कार चरण पार किया, जिनमें से 170 को विभिन्न पदों पर नियुक्त किया गया।
प्राथमिकी के मुताबिक, आरोप है कि चयनित उम्मीदवारों में कई, आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों से सीधे तौर पर जुड़े हुए थे।
सीबीआई ने इससे पहले भी तत्कालीन अध्यक्ष, तत्कालीन डिप्टी कंट्रोलर ऑफ एग्जामिनेशन, चार चयनित उम्मीदवारों और एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया था। ये सभी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। अधिकारियों ने बताया कि गिरफ्तार किए गए पांचों आरोपियों को पुलिस रिमांड के लिए अदालत में पेश किया जाएगा।
सूत्रों का कहना है कि अब जांच उन अन्य उम्मीदवारों की ओर भी बढ़ाई जाएगी, जिन्हें कथित रूप से परिणामों में धांधली से लाभ मिला।
अधिकारियों ने बताया कि मामले में व्यापक साजिश और अन्य अधिकारियों एवं उम्मीदवारों की संलिप्तता की जांच जारी है।
इससे पहले, सीबीआई ने इस मामले में आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी, उनके भतीजे नितेश सोनवानी व साहिल सोनवानी, तत्कालीन उपपरीक्षा नियंत्रक (आयोग) ललित गणवीर, श्री बजरंग पावर एंड इस्पात लिमिटेड के निदेशक श्रवण कुमार गोयल, उनके बेटे शशांक गोयल और बहू भूमिका कटियार को गिरफ्तार किया था।
शशांक गोयल, उनकी पत्नी भूमिका कटियार और नितेश का चयन डिप्टी कलेक्टर के पद पर हुआ, जबकि साहिल का चयन पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) के पद पर हुआ। ये सभी न्यायिक हिरासत में हैं।
सीबीआई ने इस साल 16 जनवरी को रायपुर की एक विशेष अदालत में एक आरोपपत्र दायर किया था, जिसमें इन सभी सात लोगों को आरोपी बनाया गया था।
आरोपपत्र में बताया गया कि टामन सिंह सोनवानी ने अपने पद का कथित तौर पर दुरुपयोग करते हुए परीक्षा से पहले अपने भतीजे नितेश और साहिल को प्रश्नपत्र उपलब्ध कराए।
इसके अलावा टामन सिंह सोनवानी और तत्कालीन उपपरीक्षा नियंत्रक ललित गणवीर ने पद का दुरुपयोग करते हुए श्री बजरंग पावर एंड इस्पात लिमिटेड के पूर्णकालिक निदेशक श्रवण कुमार गोयल के बेटे शशांक और बहू भूमिका को 45 लाख रुपये में प्रश्नपत्र उपलब्ध कराए।


