लखनऊ, प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को विधानसभा में कहा कि महाकुंभ भगदड़ की जांच के लिए न्यायिक आयोग का गठन किया गया है और वह सदन को विश्वास दिलाना चाहता हैं कि इसका कोई भी गुनहगार कितना भी बड़ा क्यों न हो, नहीं बचेगा।
उन्होंने कहा कि उनकी सरकार महाकुंभ भगदड़ और प्रयागराज यात्रा के दौरान सड़क हादसों में जान गंवाने वाले श्रद्धालुओं के परिजनों के साथ खड़ी है और उनकी हर संभव मदद करेगी।
उन्होंने कहा,‘‘ महाकुंभ भगदड़ की जांच के लिए न्यायिक आयोग का गठन किया गया है और मैं सदन को विश्वास दिलाना चाहता हूं कि प्रयागराज भगदड़ का कोई भी गुनहगार कितना भी बड़ा क्यों न हो, नहीं बचेगा।
योगी ने विपक्षी दलों के सदस्यों के आरोपों पर पलटवार किया और खासतौर से समाजवादी पार्टी (सपा) को निशाना बनाते हुए कहा कि आज के समाजवादियों के बारे में मान्यता है कि जिस थाली में वे खाते हैं, उसी में वे छेद करते हैं।
योगी आदित्यनाथ ने महाकुंभ को लेकर विपक्ष के आरोपों पर कहा कि विपक्ष निरंतर महाकुंभ के आयोजन को लेकर दुष्प्रचार कर रहा है, जबकि यह आयोजन सनातन संस्कृति का गौरव है। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म का अपमान बर्दाश्त नहीं होगा।
विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे दिन बुधवार को शून्य काल में विपक्षी दल सपा के सदस्यों ने नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय के नेतृत्व में नियम -56 के (कार्यस्थगन के तहत सदन की कार्यवाही रोककर) तहत महाकुंभ भगदड़ पर चर्चा कराने की मांग की।
विषय रखते हुए सपा सदस्य डॉक्टर आर के वर्मा ने आरोप लगाया कि महाकुंभ में भगदड़ में बड़े पैमाने पर श्रद्धालुओं की जान गयी लेकिन सरकार ने सिर्फ 30 लोगों की मौत होने का आंकड़ा जारी किया जो बाकी दिवंगत श्रद्धालुओं के परिजनों के साथ न्याय नहीं है।
वर्मा के अलावा सपा के संग्राम यादव और कांग्रेस की आराधना मिश्रा मोना ने भी सरकार पर महाकुंभ भगदड़ में बदइंतजामी के गंभीर आरोप लगाए। समाजवादी पार्टी के बागी सदस्य मनोज कुमार पांडेय ने महाकुंभ में सरकार की व्यवस्था की सराहना की।
अधिकारियों के अनुसार महाकुंभ में पिछले माह 29 जनवरी को भगदड़ में 30 श्रद्धालुओं की मौत हो गयी और 60 से अधिक घायल हो गये। इसके अलावा महाकुंभ में स्नान के लिए आने और जाने के दौरान सड़क हादसों में भी कई लोगों ने अपनी जान गंवाई है।
सदन के नेता और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्षी सदस्यों को जवाब देते हुए कहा कि 29 जनवरी के भगदड़ में जान गंवाने वाले श्रद्धालुओं और प्रयागराज कुम्भ में महास्नान में आने और वापस जाने के दौरान सोनभद्र, अलीगढ़ या अन्य जगहों पर जो श्रद्धालु सड़क दुर्घटनाओं में जिनकी मौत हुई है, उन्हें वह श्रद्धांजलि देते है।
उन्होंने कहा,‘‘ हमारी संवेदना शोक संतप्त परिजनों के प्रति है। सरकार उनके साथ खड़ी है और हर संभव मदद करेगी। प्रश्न यह है कि इस पर राजनीति करना कितना उचित है।’’
एक शेर के माध्यम से मुख्यमंत्री ने कटाक्ष किया,‘‘बड़ा हसीन है इनकी जुबान का जादू, लगाकर के आग बहारों की बात करते हैं। जिन्होंने रात में चुन-चुन के बस्तियों को लूटा, वही नसीबों के मारों की बात करते हैं।’’
मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘जब हम चर्चा में भाग ले रहे हैं, तब 56.25 करोड़ से अधिक श्रद्धालु त्रिवेणी में डुबकी लगा चुके हैं। उन्होंने विपक्षी दलों को घेरते हुए कहा कि जब वे सनातन धर्म, मां गंगा, भारत की आस्था, महाकुंभ के खिलाफ अनर्गल प्रलाप और झूठा वीडियो दिखाते हैं तो यह 56 करोड़ लोगों के साथ ही भारत की सनातन आस्था के साथ खिलवाड़ होता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह किसी पार्टी विशेष और सरकार का नहीं, बल्कि समाज का आयोजन है तथा सरकार सहयोग तथा उत्तरदायित्वों का निर्वहन करने के लिए सेवक के रूप में है। उन्होंने कहा,‘‘ सेवक के रूप में उत्तरदायित्वों का निर्वहन करना हमारी जिम्मेदारी है।
योगी ने कहा, ‘‘ हम तत्परता के साथ ऐसा करेंगे, क्योंकि हमें अपनी जिम्मेदारियों का अहसास है। हमारे मन में भारत की सनातन परंपराओं के प्रति श्रद्धा का भाव है। उन्होंने कहा कि सौभाग्य है कि सदी के महाकुंभ के साथ सरकार को जुड़ने का अवसर प्राप्त हुआ।
उनका कहना था कि तमाम दुष्प्रचार को दरकिनार करते हुए देश-दुनिया ने इस आयोजन के साथ सहभागी बनकर इसे सफलता की नई ऊंचाई तक पहुंचाया है।
योगी ने विपक्ष द्वारा कुंभ मेले में अव्यवस्था के आरोपों का खंडन करते हुए 1954, 1974 और 1986 के कुम्भ आयोजनों में हुई भगदड़ और दुर्घटनाओं का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि 1954 के कुंभ में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और महामहिम राष्ट्रपति की भागीदारी के बावजूद 800 से अधिक श्रद्धालु भगदड़ में अपनी जान गंवा बैठे थे जबकि इसके विपरीत इस बार सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता दी।
योगी ने कहा कि श्रद्धालुओं की अभूतपूर्व संख्या को देखते हुए सरकार ने कई जनपदों में ‘होल्डिंग एरिया’ और पार्किंग सुविधाओं की व्यवस्था की, जिससे यातायात और भीड़ नियंत्रण में महत्वपूर्ण सफलता मिली।
मुख्यमंत्री का कहना है कि प्रयागराज सिटी की अधिकतम क्षमता 25 लाख है,लेकिन वहां पर दो करोड़ श्रद्धालुओं को सुरक्षित स्नान करवाना किसी चमत्कार से कम नहीं था। विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा यदि कुम्भ वास्तव में केवल विशिष्ट व्यक्तियों के लिए होता, तो क्या 56 करोड़ श्रद्धालु त्रिवेणी संगम में डुबकी लगा पाते?
मुख्यमंत्री ने कहा कि समाजवादी पार्टी के कुछ नेताओं द्वारा अमृत स्नान पर सवाल उठाना केवल झूठ का प्रचार है। उन्होंने कहा कि सभी प्रमुख 13 अखाड़ों के संतों ने विधिवत रूप से सभी निर्धारित स्नानों में भाग लिया और इसे पूरे विश्व ने देखा।
योगी ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि कुछ राजनेता महाकुम्भ जैसे पवित्र आयोजन को राजनीतिक लाभ के लिए बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं।
योगी ने 29 जनवरी को मौनी अमावस्या के दिन हुई दुर्घटना का जिक्र किया, जिसमें बैरिकेड टूटने के कारण 66 श्रद्धालु चपेट में आ गए थे। सरकार की त्वरित कार्रवाई से 36 घायलों को समय पर अस्पताल पहुंचाया गया और 30 श्रद्धालुओं की दुखद मृत्यु हुई, इसमें 29 की पहचान कर ली गई है।
योगी ने कहा कि प्रयागराज के अंदर अलग-अलग जगह पर और भी अन्य स्थानों पर कुछ ‘प्रेशर प्वाइंट’ बने हुए थे जहां कुछ लोग घायल हुए और उन सभी को समय पर अस्पताल पहुंचाया गया।
उनका कहना था कि उनमें भी सात लोगों की मौत हुई थी। घायल 36 श्रद्धालु में से 35 को उनके परिजन लेकर के चले गए, एक श्रद्धालु अभी वहां पर उपचाराधीन है।
मुख्यमंत्री ने अपनी बोली हुई शायरी को लेकर नेता प्रतिपक्ष पर तंज कसा और कहा कि यह उर्दू नहीं, हिंदी है। योगी ने आरोप लगाया कि जब प्रदेश की स्थानीय बोलियों को सदन में महत्व मिला तो उन्होंने (सपा सदस्यों ने) विरोध किया क्योंकि हर अच्छे कार्य का विरोध करना समाजवादी संस्कार है।
उन्होंने कहा,‘‘हिंदी इस सदन की भाषा है। हिंदी को तो हटाया नहीं गया, बल्कि सदस्यों को छूट दी गई है कि वे इन बोलियों में बोल सकते हैं। यह थोपा नहीं गया, बल्कि सुविधा है। भोजपुरी, ब्रज, अवधी एवं बुंदेली की लिपि भी देवनागरी है।
उन्होंने नेता प्रतिपक्ष को संबोधित करते हुए कहा,‘‘आपके विरोध का मैं उपहास नहीं उड़ाता, क्योंकि आपकी आदत मुझे मालूम है। उन्होंने विपक्ष पर महाकुंभ के आयोजन को लेकर निरंतर दुष्प्रचार करने का आरोप लगाते हुए उसके बयानों को सदन में पढ़कर सुनाया और उसे कठघरे में खड़ा किया।
विपक्ष की आलोचनाओं को दरकिनार करते हुए उन्होंने साफ कहा कि यह आयोजन सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति का गौरव है एवं इसे भव्य रूप से मनाने में कोई कोताही नहीं बरती जाएगी।
उन्होंने समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी दलों के नेताओं पर तीखा हमला करते हुए कहा कि ये लोग महाकुम्भ जैसे आयोजन की भव्यता पर सवाल उठाते हैं और समाज में भ्रम फैलाने का प्रयास करते हैं।उन्होंने कहा कि विपक्ष पहले दिन से ही महाकुम्भ का विरोध कर रहा है।
योगी ने दावा किया कि विपक्ष ने महाकुम्भ को लेकर कई गलत तथ्य प्रस्तुत किए और इसे धन की बर्बादी तक करार दिया। उन्होंने विपक्ष के नेताओं के सोशल मीडिया हैंडल पर पोस्ट किए गए बयानों का जिक्र करते हुए कहा कि यह उनके संस्कार और मानसिकता को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने महाकुंभ आयोजन के पहले इस बारे में कहना शुरू किया कि इतना पैसा और इतना विस्तार देने की आवश्यकता क्या है।
योगी ने यादव के बयान के साथ-साथ कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के भगदड़ में हजारों लोग मारने वाले बयान, तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी द्वारा महाकुंभ को मृत्यु कुम्भ कहे जाने का जिक्र करते हुए उनकी आलोचना की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जया बच्चन कहती हैं कि शवों को गंगा में बहा दिया गया, लालू यादव कहते हैं फालतू है महाकुम्भ। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की गैर जिम्मेदाराना बयान समाजवादी पार्टी, कांग्रेस, राजद और तृणमूल के नेताओं द्वारा सनातन धर्म के सबसे बड़े आयोजन के प्रति दिए गए हैं।
उन्होंने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि जो लोग शुरू में महाकुम्भ का विरोध कर रहे थे, वे भी अब चुपचाप स्नान करने पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि 2013 में जब समाजवादी पार्टी की सरकार थी, तब इनके नेताओं को प्रयागराज जाने से रोका गया था, लेकिन इस बार वे खुद वहां गए और उन्होंने हमारे द्वारा की गई व्यवस्था की प्रशंसा भी की।
योगी ने अखिलेश यादव के नेतृत्व की समाजवादी पार्टी की सरकार में 2013 में हुए कुंभ की चर्चा करते हुए कहा कि 2013 का कुम्भ प्रशासनिक लापरवाही और अव्यवस्था का शिकार था, जबकि 2025 का महाकुम्भ बेहतर सुविधाओं और सुनियोजित व्यवस्था के साथ आयोजित किया जा रहा है।
उन्होंने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि जो लोग 2013 में हुई अव्यवस्थाओं के लिए जिम्मेदार थे, वे आज महाकुंभ 2025 की आलोचना कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 2013 में प्रयागराज स्टेशन पर हुई भगदड़ के बाद प्रदेश के तत्कालीन मुखिया केंद्र सरकार पर तीखे हमले कर रहे थे, केंद्र सरकार से इन्हें पैसा भी नहीं मिल रहा था और जो पैसे खर्च किये गये उनमें बेहिसाब भ्रष्टाचार हुआ।
योगी आदित्यनाथ ने 2013 और 2025 के आयोजन की तुलना करते हुए कहा कि कुम्भ की अवधि धार्मिक दृष्टिकोण से निर्धारित होती है और इस बार 45 दिन का आयोजन किया जा रहा है, जबकि 2013 में यह 55 दिनों का था।
मुख्यमंत्री का कहना था कि 2013 में कुम्भ का क्षेत्रफल मात्र 1936 हेक्टेयर (5000 एकड़ से भी कम) था, जबकि इस बार यह 10,000 एकड़ से अधिक क्षेत्र में आयोजित किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि 2013 में कुल 14 सेक्टर बनाए गए थे, जबकि 2025 में इनकी संख्या बढ़ाकर 25 कर दी गई है। उन्होंने कहा,‘‘सनातन धर्म भारत की आत्मा है और इसका सम्मान करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। हमारी सरकार इस परंपरा को भव्यता देने के लिए कृतसंकल्प है।’
उन्होंने कहा कि प्रयागराज महाकुंभ में हर जाति, मत और मजहब के लोग श्रद्धा के साथ पहुंचे हैं। योगी ने कहा कि विपक्ष महाकुम्भ ही नहीं, बल्कि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का भी विरोध करता रहा है।
उन्होंने कहा कि अयोध्या में रामलला विराजमान हुए, तब भी यही लोग विरोध कर रहे थे। उन्होंने कहा, ‘‘जब हमने प्रस्ताव दिया कि सभी विधायक अयोध्या दर्शन के लिए जाएं, तब समाजवादी पार्टी ने सदन से बहिर्गमन किया।
उन्होंने विपक्ष के बारे में कहा कि संक्रमित व्यक्ति का उपचार संभव है, लेकिन संक्रमित सोच का उपचार नहीं किया जा सकता।


