ईरान में 33 वर्षीय ब्लॉगर सोडा इब्राहिमी शमसाबादी को मौत की सजा सुनाए जाने की खबर सामने आई है। ईरान इंटरनेशनल के अनुसार, बंदर अब्बास रिवोल्यूशनरी कोर्ट की शाखा-3 ने उन्हें सुप्रीम लीडर का अपमान करने, राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ मीडिया और प्रचार गतिविधियों तथा कथित तौर पर शत्रु सरकारों के पक्ष में खुफिया और सुरक्षा गतिविधियों से जुड़े आरोपों में दोषी ठहराया है।
अदालत के फैसले में उनके खिलाफ विदेश स्थित फारसी भाषा के मीडिया संस्थानों को तस्वीरें भेजने का आरोप भी शामिल है। उनके वकील को मौत की सजा की सूचना 23 अगस्त को दी गई थी।
मानवाधिकार संगठनों की रिपोर्ट के मुताबिक, शमसाबादी पर ‘करप्शन ऑन अर्थ’ यानी ‘धरती पर भ्रष्टाचार’ (इफसाद फिल-अर्ज) का आरोप भी लगाया गया है। आरोपों में एक सैन्य स्थल या मिसाइल गिरने वाली जगह की तस्वीर लेने और उसे ईरान के बाहर संचालित फारसी भाषा के मीडिया संस्थान को भेजने की बात कही गई है।
الحكم بإعدام ناشطة إيرانية بتهمة "إهانة المرشد الأعلى" بعد تصويرها موقع سقوط صاروخ
****
صحيفة المرصد: أصدرت السلطات القضائية الإيرانية حكمًا بالإعدام بحق المواطنة الإيرانية صودا إبراهيمي شمس آبادي، البالغة من العمر 33 عامًا، وذلك بعد توجيه اتهامات لها تتصل بـ "إهانة المرشد… pic.twitter.com/p2LRqK26vN
— صحيفة المرصد (@marsdnews24) September 13, 2026
हालांकि, ये सभी आरोप ईरानी अदालत द्वारा लगाए गए हैं और स्वतंत्र रूप से इन आरोपों की पुष्टि उपलब्ध स्रोतों से नहीं हुई है।
रिपोर्टों के अनुसार, सोडा इब्राहिमी शमसाबादी को मार्च 2026 से बंदर अब्बास जेल में हिरासत में रखा गया है। ईरान इंटरनेशनल के मुताबिक, हिरासत के दौरान उन्हें करीब 20 दिनों तक एकांत कारावास में रखा गया और पूछताछ के दौरान उन पर गंभीर दबाव डाले जाने की जानकारी सामने आई है। इस अवधि में उनके परिवार को उनके ठिकाने और स्वास्थ्य की स्थिति के बारे में भी जानकारी नहीं दी गई थी।
मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, शमसाबादी सोशल मीडिया पर सरकार की कार्रवाई और विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा की आलोचना करती रही थीं। उनके सोशल मीडिया पोस्ट को भी मामले की पृष्ठभूमि से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, उनके सोशल मीडिया पोस्ट और अदालत के आरोपों के बीच संबंध के बारे में स्वतंत्र न्यायिक दस्तावेज सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं हैं।
शमसाबादी को मौत की सजा के अलावा अदालत ने दो से पांच साल तक की अतिरिक्त जेल की सजा, कुछ सरकारी सेवाओं से वंचित करने और संपत्ति जब्त करने जैसे आदेश भी दिए हैं। मानवाधिकार रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि उनका दूसरा नाम मरजिएह (Marzieh) है। कुछ स्रोत उनकी उम्र 32 वर्ष बताते हैं, जबकि ईरान इंटरनेशनल ने उन्हें 33 वर्षीय बताया है।
यह मामला ईरान में सरकार विरोधी गतिविधियों और असहमति से जुड़े मामलों में कड़ी कार्रवाई को लेकर चल रही अंतरराष्ट्रीय चिंता के बीच सामने आया है। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि विरोध प्रदर्शनों से जुड़े कई लोगों को गंभीर आरोपों में मौत की सजा दी गई है। ईरान में फांसी और मृत्युदंड के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर संयुक्त राष्ट्र तथा अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने भी चिंता जताई है।
फिलहाल सोडा इब्राहिमी शमसाबादी को सुनाई गई मौत की सजा के खिलाफ आगे की कानूनी प्रक्रिया और अपील की स्थिति स्पष्ट नहीं है। उनके मामले में लगाए गए आरोपों और अदालत के फैसले की जानकारी मुख्य रूप से ईरान इंटरनेशनल तथा ईरानी मानवाधिकार संगठनों की रिपोर्टों से सामने आई है।