मध्य प्रदेश के उज्जैन में करीब 170 साल पुराने प्रसिद्ध खड़े हनुमान मंदिर की शिफ्टिंग को लेकर मामला संवेदनशील बना हुआ है। सड़क चौड़ीकरण और विकास कार्यों के चलते प्रशासन ने मंदिर को दूसरी जगह स्थानांतरित करने की प्रक्रिया शुरू की थी, लेकिन 40 घंटे से अधिक समय बीतने के बाद भी भगवान श्री खड़े हनुमान जी की प्राचीन प्रतिमा अपनी जगह से नहीं हटाई जा सकी है।
पुरातत्व विभाग की टीम ने मंदिर परिसर और हनुमान जी की प्राचीन प्रतिमा का निरीक्षण किया है। निरीक्षण के बाद विशेषज्ञों ने आशंका जताई कि इतनी पुरानी प्रतिमा को हिलाने या विस्थापित करने के दौरान उसमें दरार आ सकती है। प्रतिमा के खंडित होने का खतरा भी बताया गया है। इसी वजह से प्रतिमा को हटाने से पहले उसकी स्थिति का विशेष स्कैन कराने और विशेषज्ञों की सलाह लेने की तैयारी की जा रही है।
पुरातत्व विभाग की इस आशंका के बाद स्थानीय श्रद्धालुओं, मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित महेश बैरागी और हिंदूवादी संगठनों की चिंता बढ़ गई है। मंदिर के आसपास का काफी हिस्सा प्रशासन की कार्रवाई में हटाया जा चुका है, लेकिन प्रतिमा को सुरक्षित तरीके से निकालना अब भी चुनौती बना हुआ है।
मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित महेश बैरागी का कहना है कि प्रशासन भगवान श्री खड़े हनुमान जी की प्रतिमा को हटाने के नाम पर प्रयोग कर रहा है। पुजारी परिवार और हिंदूवादी संगठनों ने मांग की है कि प्रशासन या तो विस्थापन की कार्रवाई रोके या फिर लिखित में प्रतिमा की सुरक्षा की गारंटी दे।
उनका कहना है कि यदि विस्थापन के दौरान प्रतिमा में जरा सी भी दरार आती है या प्रतिमा खंडित होती है तो इसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों की होनी चाहिए। संगठनों ने साफ कहा है कि जब तक जिम्मेदार अधिकारी लिखित आश्वासन नहीं देते, तब तक विस्थापन की कार्रवाई आगे नहीं बढ़ने दी जाएगी।
मंदिर की शिफ्टिंग की कार्रवाई को लेकर स्थानीय श्रद्धालुओं और हिंदू संगठनों में पहले से विरोध रहा है। अगस्त के अंत में विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल समेत अन्य संगठनों ने मंदिर को हटाने के विरोध में प्रदर्शन और चक्काजाम किया था। प्रशासन की समझाइश के बाद उस समय विरोध समाप्त हुआ था।
मंदिर से जुड़े लोगों के अनुसार, इसकी ऐतिहासिकता करीब 170 साल पुरानी बताई जाती है और कुछ दस्तावेजों के आधार पर इसका संबंध 1857 के दौर से बताया गया है। मंदिर को कंठाल से छत्री चौक तक सड़क चौड़ीकरण की परियोजना के चलते स्थानांतरित किया जा रहा है। प्रतिमा को आगे चलकर नए स्थान पर स्थापित किए जाने की योजना बताई गई है।
इस बीच सोशल मीडिया पर प्रतिमा के न हिलने को लेकर इसे ‘चमत्कार’ बताया जा रहा है। हालांकि प्रशासनिक स्तर पर इसे प्रतिमा की सुरक्षा और तकनीकी चुनौती के तौर पर देखा जा रहा है।
अधिकारियों की चिंता है कि प्रतिमा को सीधे हिलाने या निकालने की कोशिश में उसे नुकसान पहुंच सकता है। प्रशासन अब प्रतिमा को बिना नुकसान पहुंचाए स्थानांतरित करने का सुरक्षित तरीका तलाश रहा है।
मामला इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि एक तरफ उज्जैन में सिंहस्थ 2028 से जुड़े विकास और सड़क चौड़ीकरण के काम चल रहे हैं, वहीं दूसरी ओर प्राचीन धार्मिक स्थल और श्रद्धालुओं की आस्था का मुद्दा जुड़ा हुआ है। फिलहाल प्रतिमा अपनी मूल जगह पर मौजूद है और आगे की कार्रवाई स्कैनिंग, विशेषज्ञों की सलाह तथा प्रशासन की ओर से लिखित आश्वासन के बाद तय होने की संभावना है।