रक्षाबंधन भाई-बहन के प्यार, विश्वास और स्नेह का त्योहार है। इस दिन बहनें भाई की कलाई पर राखी बांधती हैं और भाई उनकी रक्षा का संकल्प लेते हैं। साल 2026 में रक्षाबंधन शुक्रवार 28 अगस्त को मनाया जाएगा। इस बार त्योहार के समय पंचक भी रहेगा। इसलिए लोगों के मन में यह सवाल है कि क्या पंचक के दौरान राखी बांधना उचित होगा और किन कामों से बचना चाहिए।
अगस्त में कब शुरू होगा पंचक?
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, अगस्त 2026 में पंचक गुरुवार 27 अगस्त को दोपहर 1:35 बजे शुरू होगा। इसका समापन मंगलवार 1 सितंबर को सुबह 3:23 बजे होगा। यानी रक्षाबंधन पंचक की अवधि में ही आएगा। हालांकि, पंचक का अर्थ यह नहीं है कि इस दौरान हर काम अशुभ होता है। कुछ विशेष कार्यों को लेकर ही सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
क्या पंचक में राखी बांध सकते हैं?
मान्यताओं के अनुसार पंचक के दौरान भाई को राखी बांधने में कोई रोक नहीं है। रक्षाबंधन को एक पवित्र और शुभ पर्व माना जाता है और पंचक इसे मनाने में बाधा नहीं माना जाता। इसलिए बहनें पंचक के दौरान भाई की कलाई पर राखी बांध सकती हैं। हालांकि, पूजा-पाठ और राखी बांधने के लिए शुभ मुहूर्त का ध्यान रखना सही माना जाता है।
क्या होता है अग्नि पंचक?
जब पंचक की शुरुआत मंगलवार या गुरुवार से होती है तो इसे अग्नि पंचक कहा जाता है। इस बार पंचक गुरुवार से शुरू हो रहा है इसलिए इसे अग्नि पंचक माना जा रहा है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार इस दौरान नया निर्माण शुरू करने, मशीनरी खरीदने और औजारों से जुड़े काम करने से बचना चाहिए। वहीं, कोर्ट-कचहरी या विवाद से जुड़े मामलों में काम करना उचित माना जाता है।
पंचक में किन कामों से बचें?
पंचक के दौरान दक्षिण दिशा की यात्रा को शुभ नहीं माना जाता। इसके अलावा लकड़ी, घास या अन्य ज्वलनशील सामग्री इकट्ठा करने से बचने की सलाह दी जाती है। इस अवधि में नया पलंग या चारपाई बनवाना, घर की छत या लेंटर का काम शुरू करना भी वर्जित माना जाता है। अंतिम संस्कार के समय भी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार विशेष शांति कर्म करने का विधान बताया गया है।
पंचक में खरीदारी और शुभ कार्य
मान्यताओं के अनुसार पंचक के दौरान लकड़ी, लोहा, चारपाई और नए कपड़े खरीदने से बचना चाहिए। विवाह, गृह प्रवेश और मुंडन जैसे बड़े मांगलिक कार्य भी इस अवधि में वर्जित माने जाते हैं। पंचक को पांच नक्षत्रों धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती का संयोग माना जाता है। हालांकि, धार्मिक मान्यताओं में पंचक को पूरी तरह अशुभ नहीं माना गया है और सामान्य कामकाज, पूजा-पाठ तथा कुछ अन्य कार्य किए जा सकते हैं।









