अयोध्या, जे.बी. नर्सरी स्कूल सोसाइटी, अयोध्या में आयोजित चार दिवसीय शिक्षकों की थिएटर एवं क्रिएटिव पैडागॉजी कार्यशाला का समापन जापानी लेखिका तेत्सुको कुरोयानागी के प्रसिद्ध आत्मकथात्मक उपन्यास ‘तोत्तो-चान’ पर आधारित प्रभावशाली नाट्य प्रस्तुति के साथ हुआ।
विद्यालय के शिक्षकों द्वारा मंचित इस नाटक ने उपस्थित दर्शकों को भावनात्मक रूप से जोड़ते हुए भरपूर सराहना प्राप्त की।

भोपाल की विहान ड्रामा वर्क्स संस्था द्वारा आयोजित इस कार्यशाला में लगभग 100 शिक्षकों ने भाग लिया। नाटक का रूपांतरण, अभिकल्पना एवं निर्देशन संस्था के संस्थापक एवं रंगनिर्देशक सौरभ अनंत ने किया, जबकि संगीत एवं काव्य का दायित्व हेमंत देवलेकर ने निभाया। उल्लेखनीय है कि प्रतिभागी शिक्षकों ने मात्र चार दिनों के प्रशिक्षण में इस नाट्य प्रस्तुति को तैयार कर सफलतापूर्वक मंचित किया।

विद्यालय की निदेशक श्रीमती मंजुला झुनझुनवाला की प्रेरणा एवं सहयोग से आयोजित इस कार्यशाला का उद्देश्य शिक्षकों को रचनात्मक शिक्षण, अनुभवात्मक अधिगम तथा बाल-केंद्रित शिक्षण पद्धतियों से परिचित कराना था। प्रशिक्षण के दौरान अभिनय, संगीत, शारीरिक अभिव्यक्ति, कहानी-कथन, कल्पनाशीलता, समूह निर्माण और थिएटर-इन-एजुकेशन की विभिन्न विधाओं पर व्यावहारिक अभ्यास कराया गया।
समापन प्रस्तुति ‘तोत्तो-चान’ ने बालमन की जिज्ञासा, स्वतंत्र सोच, संवेदनशीलता और सीखने की स्वाभाविक प्रक्रिया को प्रभावशाली ढंग से मंच पर प्रस्तुत किया। नाटक का मुख्य संदेश था कि शिक्षा का उद्देश्य बच्चों को एक ही साँचे में ढालना नहीं, बल्कि उनकी विशिष्ट प्रतिभा, रचनात्मकता और संभावनाओं को पहचानकर उन्हें विकसित होने का अवसर देना है।

प्रस्तुति के दौरान शिक्षकों की ऊर्जा, आत्मविश्वास और सामूहिक समर्पण ने दर्शकों को विशेष रूप से प्रभावित किया। अभिभावकों, अतिथियों एवं शिक्षा जगत से जुड़े लोगों ने इस पहल को शिक्षा और रंगकला के प्रभावी समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। प्रतिभागी शिक्षकों ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि इस प्रशिक्षण ने उन्हें कक्षा-कक्ष को अधिक जीवंत, आनंदमय और सहभागितापूर्ण बनाने की नई दृष्टि प्रदान की।
कार्यक्रम के समापन पर विद्यालय परिवार ने विहान ड्रामा वर्क्स की पूरी टीम के प्रति आभार व्यक्त किया तथा सभी प्रतिभागियों को सहभागिता प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। साथ ही भविष्य में भी इस प्रकार की रचनात्मक एवं नवाचारी कार्यशालाओं के आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया गया। कार्यशाला का संचालन सौरभ अनंत के नेतृत्व में हेमंत देवलेकर, श्वेता केतकर, अंकित पारोचे, शुभम कटियार, रुद्राक्ष भायरे और ईशा गोस्वामी सहित टीम के अन्य सदस्यों ने किया।










