घर आवासीय है लेकिन रिकॉर्ड में कमर्शियल दर्ज; सड़क की चौड़ाई बढ़ाकर लगाया जा रहा अतिरिक्त कर, यदि नगर निगम प्रशासन ने तुरंत इस दोषपूर्ण जियो-टैगिंग सर्वे को निरस्त नहीं किया और भौतिक सत्यापन (Physical Verification) कर टैक्स बिलों को संशोधित नहीं किया, इस धांधली के खिलाफ उच्च न्यायालय (High Court) में जनहित याचिका (PIL) दायर करेंगे।
अयोध्या में नगर निगम द्वारा कर निर्धारण और जियो टैगिंग की प्रक्रिया को लेकर नागरिकों में असंतोष बढ़ता जा रहा है। कई क्षेत्रों के मकान मालिकों का आरोप है कि जियो टैगिंग और डिजिटल सर्वे के नाम पर उनके पुराने आवासीय मकानों को व्यावसायिक (कमर्शियल) श्रेणी में दर्ज कर दिया गया है, जबकि वास्तविकता में वहां कोई व्यावसायिक गतिविधि संचालित नहीं होती।
इतना ही नहीं, कई मामलों में मकान के सामने की सड़क की वास्तविक चौड़ाई से अधिक दर्ज कर गृहकर और जलकर की राशि बढ़ा दी गई है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि वर्षों पुराने मकानों पर पहले सामान्य आवासीय दर से कर लगता था, लेकिन हाल में जारी कर निर्धारण विवरण में कई मकान अचानक व्यावसायिक श्रेणी में दिखने लगे हैं। इससे कर की राशि कई गुना तक बढ़ गई है। लोगों का आरोप है कि बिना किसी पूर्व सूचना और भौतिक सत्यापन के ऑनलाइन रिकॉर्ड में बदलाव कर दिया गया।
नागरिकों के अनुसार कर निर्धारण में सड़क की चौड़ाई भी महत्वपूर्ण आधार होती है। आरोप है कि कई मोहल्लों में जहां सड़क की चौड़ाई 12 से 15 फीट है, वहां रिकॉर्ड में 30 से 40 फीट तक दर्शाया गया है। सड़क की चौड़ाई बढ़ने पर संपत्ति का मूल्यांकन और कर स्वतः बढ़ जाता है, जिससे मकान मालिकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि नगर निगमों द्वारा जियो टैगिंग और डिजिटल सर्वे का उद्देश्य कर प्रणाली को पारदर्शी बनाना होता है, लेकिन यदि सर्वेक्षण में त्रुटियां हों तो नागरिकों को अनुचित कर भार झेलना पड़ सकता है। नगर निकायों में संपत्ति की श्रेणी, उपयोग और सड़क की स्थिति के आधार पर कर निर्धारण किया जाता है।
अयोध्या नगर निगम क्षेत्र में आवासीय और अनावासीय (व्यावसायिक) भवनों पर अलग-अलग दरों से गृहकर लगाए जाने की व्यवस्था लागू है। नगर निगम समय-समय पर गृहकर, जलकर और सीवर कर का निर्धारण एवं वसूली करता है।
पीड़ित नागरिकों ने मांग की है कि सभी विवादित संपत्तियों का पुनः भौतिक सत्यापन कराया जाए, गलत श्रेणीकरण को तत्काल सुधारा जाए तथा सड़क की वास्तविक चौड़ाई के आधार पर कर निर्धारण किया जाए। लोगों का कहना है कि यदि उनकी शिकायतों का समाधान नहीं हुआ तो वे सामूहिक रूप से नगर निगम प्रशासन और शासन स्तर पर शिकायत दर्ज कराएंगे।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि डिजिटल सर्वे और जियो टैगिंग की प्रक्रिया में हुई त्रुटियों का खामियाजा आम नागरिक भुगत रहे हैं। अब सभी की निगाहें नगर निगम प्रशासन पर हैं कि वह इन शिकायतों की निष्पक्ष जांच कर लोगों को राहत देता है या नहीं।










