लखनऊ, इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने फैजुल्लागंज वार्ड से निर्वाचित पार्षद को पांच महीने बाद भी शपथ नहीं दिलाए जाने पर बृहस्पतिवार को लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल के प्रशासनिक और वित्तीय अधिकार जब्त कर लिए।
पीठ ने कहा कि महापौर के ये अधिकार तब तक न्यायालय के पास रहेंगे, जब तक वह फैजुल्लागंज वार्ड से निर्वाचित घोषित किए गए पार्षद ललित किशोर तिवारी को शपथ नहीं दिला देतीं।
न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति एसक्यूएच रिजवी की पीठ ने यह आदेश पारित किया।
अदालत ने यह सख्त रुख चुनाव अधिकरण द्वारा तिवारी को पार्षद घोषित किए जाने के पांच महीने बाद भी उन्हें शपथ नहीं दिलाए जाने पर अपनाया।
इससे पहले, 13 मई को हुई सुनवाई में भी अदालत ने मामले पर नाराजगी जताते हुए निर्देश दिया था कि एक सप्ताह के भीतर तिवारी को शपथ दिलाई जाए।
अदालत ने यह भी कहा था कि ऐसा नहीं होने पर महापौर, जिलाधिकारी और नगर आयुक्त को 21 मई को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होना होगा।
पिछली सुनवाई के दौरान महापौर की ओर से व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट के लिए आवेदन दायर किया गया था, जबकि जिलाधिकारी ने अवकाश का हवाला देते हुए छूट मांगी थी।

