अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर राजनयिक परंपराओं को धता बताते हुए ब्रिटेन के महाराज चार्ल्स तृतीय से हुई निजी बातचीत सार्वजनिक कर दी है।
ट्रंप ने मंगलवार को चार्ल्स तृतीय और उनकी पत्नी कैमिला के सम्मान में आयोजित राजकीय भोज में कहा कि दिन में एक निजी बैठक में ब्रिटेन के महाराज ने उनसे सहमति जताई थी कि ईरान को कभी भी परमाणु हथियार रखने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘‘हम इस समय पश्चिम एशिया में थोड़ा काम कर रहे हैं… और हम बहुत अच्छा कर रहे हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने राजकीय भोज में मौजूद लोगों से कहा, ‘‘हमने उस विशेष प्रतिद्वंद्वी को सैन्य रूप से परास्त कर दिया है, और हम उस प्रतिद्वंद्वी को कभी परमाणु हथियार रखने की अनुमति नहीं देंगे। चार्ल्स भी मेरी इस बात पर सहमत हैं। हम उस प्रतिद्वंद्वी को कभी परमाणु हथियार रखने की अनुमति नहीं देंगे।
अमेरिकी राष्ट्रपति की इस टिप्पणी ने ब्रिटेन के कई विशेषज्ञों को हतप्रभ कर दिया है।
उनका कहना है कि परंपरा के अनुसार, लोगों को महाराज के साथ हुई निजी बातचीत को सार्वजनिक रूप से साझा नहीं करना चाहिए। इसका एक कारण यह है कि महाराज को राजनीतिक विवादों से ऊपर रहना होता है, और दूसरा यह कि यदि उनके शब्दों को गलत तरीके से उद्धृत किया जाए तो महाराज सार्वजनिक बहस में शामिल होकर उसे सही नहीं कर सकते।
लंदन विश्वविद्यालय के रॉयल हॉलोवे में संवैधानिक कानून और राजशाही के विशेषज्ञ क्रेग प्रेस्कॉट ने कहा, ‘‘आम तौर पर, प्रोटोकॉल के तौर पर, मुझे लगता है कि राष्ट्राध्यक्षों के बीच चर्चाएं पर्दे के पीछे, उन बंद बैठकों में होंगी, ताकि उन्हें निजी रखा जा सके।’’ उन्होंने कहा, ‘‘और, जैसा कि आप जानते हैं, यह कुछ ऐसा था जिससे ब्रिटिश सरकार बचना चाहती थी।
बकिंघम पैलेस (ब्रिटिश राजपरिवार का शाही निवास) ने राष्ट्रपति की टिप्पणियों के संदर्भ पर संभवत: स्थिति स्पष्ट के उद्देश्य से जारी एक बयान में कहा, ‘‘महाराजा स्वाभाविक रूप से परमाणु प्रसार की रोकथाम पर अपनी सरकार के दीर्घकालिक और स्थापित रुख के प्रति सचेत हैं।




