उच्चतम न्यायालय ने 32 वर्षीय उस व्यक्ति को कृत्रिम जीवन रक्षक प्रणाली हटाकर निष्क्रिय इच्छामृत्यु (‘पैसिव युथनेसिया’) की बुधवार को अनुमति दे दी जो 12 साल से अधिक समय से कोमा में है।
निष्क्रिय इच्छामृत्यु का अर्थ है कि किसी गंभीर रूप से बीमार व्यक्ति को जीवित रखने वाली चिकित्सा सहायता को रोकने या जीवन रक्षक प्रणाली को हटाने की अनुमति देना ताकि उसकी स्वाभाविक रूप से मौत हो सके।
हर्ष राणा 2013 में एक इमारत की चौथी मंजिल से गिरने के कारण सिर में चोट लगने से घायल हो गया था और वह एक दशक से अधिक समय से कोमा में है।
उच्चतम न्यायालय ने इससे पहले 32 वर्षीय व्यक्ति के माता-पिता से मिलने की इच्छा जताई थी। उसने दिल्ली स्थित एम्स के चिकित्सकों के द्वितीयक चिकित्सा बोर्ड द्वारा दाखिल की गई राणा की चिकित्सा संबंधी रिपोर्ट का अवलोकन किया था और कहा था कि यह रिपोर्ट ‘‘दुखद’’ है।
प्राथमिक चिकित्सा बोर्ड ने मरीज की स्थिति की जांच करने के बाद कहा था कि उसके ठीक होने की संभावना नगण्य है।
उच्चतम न्यायालय ने पिछले साल 11 दिसंबर को कहा था कि प्राथमिक चिकित्सा बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार यह व्यक्ति ‘‘बेहद दयनीय स्थिति’’ में है।
उच्चतम न्यायालय द्वारा 2023 में जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, कोमा की स्थिति वाले मरीज की कृत्रिम जीवन रक्षक प्रणाली हटाने को लेकर विशेषज्ञों की राय लेने के लिए एक प्राथमिक और एक द्वितीयक चिकित्सा बोर्ड का गठन करना अनिवार्य है।
सुप्रीम कोर्ट ने पिछले 13 साल से कोमा में पड़े गाजियाबाद, यूपी के हरीश राणा को इच्छा मृत्यु की इजाजत दी। ये देश का पहला मामला है, जब इच्छा मृत्यु की इजाजत SC से मिली है।
हरीश साल 2003 में चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के छात्र थे और ऊंचाई से गिरने के बाद वो कभी होश में नहीं आ सके। हरीश… pic.twitter.com/fyZyzWgm5F
— Sachin Gupta (@SachinGuptaUP) March 11, 2026










