लखनऊ, बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने यूपीआई लेनदेन पर लागू होने वाली नई शुल्क व्यवस्था को लेकर सरकार पर निशाना साधा है।
मायावती ने शुक्रवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा कि पहले सरकार ने डिजिटल भुगतान और यूपीआई को तेजी से बढ़ावा दिया और अब चुनिंदा बड़े व्यापारी लेनदेन पर शुल्क लगाने की व्यवस्था शुरू की जा रही है। उनके मुताबिक इसका अंतिम असर आम लोगों के खर्च पर पड़ सकता है।
दरअसल, नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) की नई व्यवस्था के तहत 15 अक्टूबर 2026 से 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा Person-to-Merchant UPI लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा।
75,000 रुपये या उससे अधिक के लेनदेन पर MDR की अधिकतम सीमा 300 रुपये रखी गई है। वहीं, व्यक्ति से व्यक्ति के बीच होने वाले UPI भुगतान पर यह शुल्क लागू नहीं होगा। छोटे व्यापारियों के लिए भी निर्धारित छूट का प्रावधान है।
हालांकि, मायावती ने इस व्यवस्था को जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ से जोड़ते हुए कहा कि शुल्क का नाम चाहे कुछ भी रखा जाए, यदि इसकी लागत कारोबार की कीमतों में शामिल होती है तो उसका असर उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है।
उन्होंने सरकार से ऐसी नीतियां बनाने की अपील की जिनमें आम लोगों के कल्याण को प्राथमिकता मिले। मायावती ने देश में गरीबी और महंगाई का भी उल्लेख किया और कहा कि आर्थिक दबाव झेल रही जनता पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ना चाहिए।
नई व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण प्रावधान यह भी है कि MDR व्यापारी पक्ष पर लागू होगा और इसे सीधे ग्राहक से वसूलने की अनुमति नहीं है। सरकार ने बैंकों और संबंधित भुगतान संस्थाओं को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं कि व्यापारी इस शुल्क को ग्राहकों पर न डालें।
मायावती ने उत्तर प्रदेश सरकार की करीब 300 करोड़ रुपये की लागत से लगभग 14,500 स्कूलों को ‘स्मार्ट स्कूल’ बनाने की घोषणा पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इसे अच्छी पहल बताया, लेकिन कहा कि स्मार्ट पढ़ाई से पहले स्कूलों में बच्चों के लिए बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित करना जरूरी है।
उन्होंने पक्की छत, बेंच-कुर्सी, किताबें, शौचालय, खेल मैदान और साफ-सफाई जैसी सुविधाओं पर ध्यान देने की बात कही। साथ ही उन्होंने सवाल उठाया कि प्रति स्कूल लगभग दो लाख रुपये के बजट में इन सभी आवश्यकताओं को किस तरह पूरा किया जाएगा।
मायावती के बयान से यूपीआई शुल्क और प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था दोनों मुद्दे एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गए हैं।
वहीं नई MDR व्यवस्था का उद्देश्य UPI भुगतान प्रणाली के लिए दीर्घकालिक राजस्व मॉडल तैयार करना और डिजिटल भुगतान के बुनियादी ढांचे, साइबर सुरक्षा तथा संबंधित सेवाओं को वित्तीय आधार देना बताया गया है।