उत्तराखंड में चमोली जिले की नीती घाटी को जोड़ने के लिए तमक नाले पर बना ‘बेली ब्रिज’ सोमवार शाम अतिवृष्टि के कारण नाले में आयी बाढ़ के साथ बह गया जबकि इस दौरान सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) का एक वाहन चालक भी पानी के तेज बहाव में बहकर लापता हो गया।
तमक नाले में आयी बाढ़ का तत्काल संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों को राहत एवं बचाव कार्यों के साथ निचले क्षेत्रों में एहतियाती कदम उठाने के निर्देश दिए।
अधिकारियों के मुताबिक, सूचना मिलते ही जिला प्रशासन, राज्य आपदा प्रतिवादन बल (एसडीआरएफ) और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) के राहत एवं बचाव दलों को घटनास्थल के लिए रवाना किया गया। इस पुल के बह जाने से तमक से आगे जुम्मा से लेकर नीती समेत करीब 12 गांव और सीमा क्षेत्र का सड़क संपर्क टूट गया है। पिछले कई वर्षों से तमक नाले में बाढ़ और भूस्खलन के कारण जोशीमठ-नीती मोटर सड़क बाधित होती रही है।
इस वीडियो को दिल थाम कर देखियेगा, बवंडर इसे ही कहते है। ये पहाड़ी बवंडर था जो भारी भरकम पुल को तिनके की तरह उठा ले गया।
चमोली जनपद में सोमवार दोपहर हुई तेज बारिश के बाद तमक नाला अचानक उफान पर आ गया। नाले में आए तेज बहाव के दायरे में जो आया, उसे बहा ले गया, सीमा सड़क संगठन द्वारा… pic.twitter.com/9FxdyktQXp— Ajit Singh Rathi (@AjitSinghRathi) August 10, 2026
तमक नाले में बाढ़ के मलबे के कारण अनेक बार उसके समीप स्थित धौली गंगा में अवरोध उत्पन्न हुआ है। चमोली के जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी एन के जोशी ने बताया कि ज्योतिर्मठ (जोशीमठ) से सीमांत क्षेत्र को जोड़ने वाले मलारी—नीति राष्ट्रीय राजमार्ग पर बना बेली ब्रिज तमक नाले की बाढ़ में बह गया है। उन्होंने बताया कि बीआरओ की ओर से वैकल्पिक व्यवस्थाओं के लिए कार्य शुरू कर दिया गया है और एक-दो दिन में आवागमन की व्यवस्था हो जाएगी।
ज्योतिर्मठ के तहसीलदार महेंद्र आर्य ने मीडिया को बताया कि तमक नाले में आयी बाढ़ में बीआरओ का एक वाहन चालक भी बहकर लापता हो गया। उन्होंने बताया कि लापता चालक का नाम पंकज है जो नदी की बाढ़ का अवलोकन करते समय अचानक बहे पुल की चपेट में आकर बह गया। उन्होंने बताया कि पंकज पिथौरागढ़ जिले का रहने वाला है।
इसके अलावा, नाले में आयी बाढ़ में एक वाहन भी बह गया है। कुछ साल पूर्व तमक नाले पर बना पक्का पुल बाढ़ की चपेट में आ गया था जिसके बाद बीआरओ ने ‘बेली ब्रिज’ के जरिए आवागमन शुरू कराया था। अधिकारियों ने बताया कि सुरक्षा के मद्देनजर मलारी की ओर से वाहनों की आवाजाही रोक दी गई है जबकि प्रशासनिक दल मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा ले रहे हैं।
तमक नाले में बढ़े जल प्रवाह के कारण अलकनंदा नदी का जलस्तर बढ़ने की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने निचले इलाकों में नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। पुलिस प्रशासन की ओर से मुनादी कर लोगों को सावधानी बरतने और नदी-नालों से दूर रहने के लिए जागरूक किया जा रहा है।
इस बीच, मुख्यमंत्री ने तमक नाले में आयी बाढ़ का संज्ञान लेते हुए तत्काल प्रदेश के आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन से जानकारी ली तथा अधिकारियों को राहत एवं बचाव कार्य के साथ निचले क्षेत्रों में एहतियाती उपाय करने को कहा।
उन्होंने पुल बहने के कारण आसपास के गांवों में राशन, खाद्य सामग्री, दवाइयों एवं अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित न होने देने के लिए विशेष व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
उधर, मौसम विज्ञान विभाग के हाइड्रोमेट डिवीजन स्थित ‘श फ्लड गाइडेंस सेल’ उत्तराखंड के लिए अगले 24 घंटों में अचानक बाढ़ आने के खतरे का बुलेटिन जारी किया है। बुलेटिन के अनुसार, मंगलवार 11 अगस्त की शाम साढ़े पांच बजे तक प्रदेश के 12 जिलों में कुछ जलग्रहण क्षेत्रों एवं आसपास के क्षेत्रों में कम से मध्यम स्तर की अचानक बाढ़ आने का जोखिम है।
बुलेटिन के अनुसार, अल्मोड़ा, बागेश्वर, चमोली, चंपावत, देहरादून, टिहरी गढ़वाल, हरिद्वार, नैनीताल, पिथौरागढ़, रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी तथा पौड़ी गढ़वाल में अगले 24 घंटों के दौरान कुछ क्षेत्रों में अचानक बाढ़ आ सकती है।
प्रदेश के आपदा प्रबंधन सचिव सुमन ने कहा कि मौसम विभाग एवं अन्य तकनीकी संस्थानों से प्राप्त पूर्व चेतावनियों के आधार पर राज्य का आपदा प्रबंधन तंत्र पूरी तरह सतर्क है। उन्होंने प्रदेशवासियों एवं पर्यटकों से अपील की है कि मौसम खराब होने अथवा लगातार बारिश की स्थिति में अनावश्यक यात्रा से बचें।










